शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

मंगलवार, 27 जनवरी 2026

चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।

चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा। 

मीठ खूब खाइन ता फंस गें मधुमेह मा।। 

राजा मांडा घाई हाल होइहैं  हजूर के 

कमंडल फेकय लागें मण्डल के नेह मा।। 

हेमराज हंस  

हंस कै जरुरत नहीं

हंस  कै जरुरत  नहीं  उनही  ता  सुआ चाही। 
रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक  खुआ चाही।। 

बेमारी से  हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर 
बे असर  दबा  हैं  ता   रोगी का दुआ   चाही। । 

हांथी अस तरक्की देखि के भोकैं लगें कूकुर कस 
अइसै सब के जीमन मा झरहा  जरतुआ चाही।।

भला बताबा गूलर का ज्वार भाटा से का मतलब 
ओही ता गुजर के निता बस  एकठे  कुआं चाही।। 

घुप्प अँधिआर  होइ  गा कइसा  भरी दुपहरी मा 
कस्यप से कहिद्या  हंस   सुरिज का उआ चाही। । 
हेमराज हंस 
 

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

का बताई की कहां कहां पिरात है

 बघेली कबिता 
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का   बताई   की   कहां    कहां   पिरात  है। 
बैचैन  हबै  जिउ  मन   बूढ़त   उतरात  है।। 
 
उनखर फरक रही ही सकारे से बायीं आँख
पलकैं लगउतीं लूसी  ता  काजर सुगात है।।

वाठर  बनाउत    तक   ता  उनसे  नहीं बनै 
लबरी   बता   रहे   हें  अमल्लक   जनात है ।।

उनखे  चिकोटी  चींथे  कै चिन्हारी  बनी  ही 
आँखी  मा  उनखे   प्रेम  केर  जल प्रप्रात है।।

पाबन   पुनीत  प्रीत   कै  पूजा  यतर  ही  हंस 
तुलसी के चउरा  का दिआ  जस टिमटिमात है।।
हेमराज हंस

रविवार, 12 अक्टूबर 2025

शंकरलाल तिवारी जी


 पंचतत्व  में  खो  गये  , श्री  युत   शंकर लाल। 

जनहित  के  संघर्ष को,  रखेगा विन्ध्य सभाल।।  


कौन !  सुनेगा ! अब यहाँ,  दीन हीन की पीर !

विन्ध्य  विदाई  दे  रहा ,    भर  नैनों   में  नीर!! 


लोकतंत्र  जन कंठ की , बन कर रहे अवाज। 

जनता के दिल में किया लोक रत्न  ने राज।।  


शोक ! छा  गया विन्ध्य में, थमी समय की चाल!

सादर  है श्रद्धांजली ,  हे! जन नायक   लाल !!  

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

हे सारद माई करउँ चेरउरी।


 हे  सारद माई  करउँ चेरउरी। 

तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।


नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।

कबि अस  मोरे नहीं आचरन।  ।

अइगुन करत बीत मोरी अउरी। 


हमूं का आसिरबाद दे  मइय्या। 

बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।। 

हे हँसबाहिनी ग्यान कै  गउरी । 


सब काही तैं   दिहे बुद्धि बर। 

मोर  तोरे  चरनन  मा  है  घर। । 

तउअव  मोर मती ही बउरी। 


कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा। 

धोबर जाय  पाखण्ड औ  इरखा।।  

हंस के  हिदय  बना ले चउरी। 

हेमराज हंस 

हे सारद माई करउँ चेरउरी

हे  सारद माई  करउँ चेरउरी। 
तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।

नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।
कबि अस  मोरे नहीं आचरन।  ।
अइगुन करत बीत मोरी अउरी। 

हमूं का आसिरबाद दे  मइय्या। 
बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।। 
हे हँसबाहिनी ग्यान कै  गउरी । 

अनगइयन का दिहे बुद्धि बर। 
मोर  तोरे  चरनन  मा  है  घर। । 
तउअव  मोर मती ही बउरी। 

कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा। 
धोबर जाय  पाखण्ड औ  इरखा।।  
हंस के  हिदय  बना ले चउरी। 
हेमराज हंस 

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर महंती देखि के

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर   महंती देखि के। 
पै अपनौ पचे  मउन हन उनखर  कुसंती देखि के।। 

ना  राम  रमउहाल  ना  साहब  सलाम  पैलगी 
हम ता चउआन हन  इरखा कै खंती  देखि के।। 

आसा  ही  राम दै की   बहुरिहैं  अपनव  दिन
 मरय का मन परा थै उनखर जयंती देखि के।। 

केतनेव  क्वारा उजरि  गें  नकली  दबाई मा 
पुलिस लउट आयी गरे मा  बैजन्ती देखि के।। 

फुर कहब  ता  हंस  करू सब दिना रहब 
चुआ थी   लार  इंद्र कै  दमयंती   देखि के।। 
हेमराज हंस  

सोमवार, 17 मार्च 2025

नवा साल

 भारत के नेरे यजु साम ॠगु अथर्व है।

अपने परिपाटी का हमीं बड़ा गर्व है ।।
कोट कोट बधाई अपना का देस बासिव
आजु अपने देस का नवा साल पर्व है ।।

आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे।

 बघेली कविता 
आबा  उनखे  बेलहरा का चूना देखाई थे। 
जुजबी  नहीं   दोउ    जूना     देखाई थे। । 

चपरासी के भरती मा  इंजीनियर ठाढ़ हें 
देस मा  बेरोजगारी का नमूना  देखाई थे। । 

अब एक डालर मा  सतासी का  अबरेज है 
फुक्क फुक्क   करत  वा लूना देखाई थे। । 

 गुंगुआत गोइआरो  मची  गाँव  मा गोहार 
बस्ती का  बियाबान अस सूना  देखाई थे। । 


बरायन  नसाय  गै   कलस  के प्रेम मा 
ओखे  कला  का    गोठा  गूना  देखाई   थे। । । । 
हेमराज हंस - भेड़ा  मैहर 

मंगलवार, 16 अप्रैल 2024

खूब सराही भाग का , हम भारत के लोग

 केत्तव पुरखा  गुजरिगें, मन  मा  लये रहस्स।  
बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।। 
 
अपने  भुंइ  मा  राम जू , मना  रहे  हें पर्ब ।
सत्य सनातन धर्म का, आज हिदय मा गर्ब।। 
 
आँखिन से देख्यन हमूं ,पहिल नमै तिथि जोग।
खूब  सराही   भाग का , हम  भारत  के  लोग। । 

कुछ जन मुंह ओरमा लइन, देख के अबध उराव।
जे   भारत    के  पर्ब से,    राखंय     कपट   दुराव।। 

हमहूं साक्षी बन गयन, समय लइस जब मोड़। 
पूरी  दुनिया  का  दिहिस, श्री राघव  से  जोड़।।  

राम देस कै आतिमा, राम देस के प्रान ।
अपने भारत देस कै, रामै से पहिचान ।।
हेमराज हंस 


बुधवार, 10 अप्रैल 2024

SAMDHI SAHEB SHRI YUT TIWARI JU


 

हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज।

 हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज। 

ईश्वर कै आराधना अलग अलग अंदाज।। 


पण्डा बइठ देवार मा बजै नगरिया झांझ। 

हांक परी ओच्छा मोरी गूँजे नौ दिन साँझ।। 


जबा देबारे बोबरि गा होय हूम अस्थान। 

संझा से लै रात तक मढ़ई भगत कै तान।। 

खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान

 जीबन  के  हर  पक्ष  का,जे  दे  सरल निदान। 

खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान।।


लगी  रही  जब  देस  मा, गरिआमै  कै  रयाव।

ता  न किहा  आलोचना, औ न दीन्हया ठयाव।।


डेंगू अउर  मलेरिया,  कह्या  तु  ऊल जलूल। 

वा तोहरे अपमान का, सकब  न हरबी भूल।। 

हेमराज हंस   

सोमवार, 8 अप्रैल 2024

रविवार, 7 अप्रैल 2024

जउन बोया वा काटा भाई।

 जउन   बोया  वा  काटा  भाई। 

अब   काहे    का   घाटा  भाई।।


जर्जर   पोथी   ही  चरित्त कै 

वमै   चढ़ा   ल्या  गाता भाई।।


भया  सुखे  दुःख ठाढ़ न कबहूं  

तब    काहे   का   नाता  भाई। ।


बड़े    सत्तबादी    बक्ता    हा

पुन  थूंका   पुन  चाटा   भाई।।


आजु हबै मुँह जउकी का जउका   

काल्ह  कटी  पुन  लाटा भाई। । 


काहु  का परथन कहूं समर्थन 

आपन  मतलब    सांटा  भाई।।


ऐसी   कूलर  अपना  का  सुभ 

"हँस"   के   है  फर्राटा    भाई।  ।

हेमराज हँस --9575287490 


शनिवार, 6 अप्रैल 2024

जब परछन भै अबध कै

 जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान। 

अब सत्ता  का स्वाद है,  खट्टा करू कसान।।  

जे जनता  के  भाबना, केर  करी  तउहीन। 

ता फुर माना राम दै, रही  न कउनव दीन।।  

सगले अइगुन माफ

 श्री राघव जू खुद कहिन, तमिलनाडु मा साफ। 

जे अइ उनखे  सरन मा, सगले अइगुन  माफ।।  

हेमराज हँस 

बुधवार, 3 अप्रैल 2024

डारी सब जन बोट।

 जनता से बिनती हिबय, डारी  सब जन बोट। 
जिव निछोह बिदुरा सकैं, लोकतंत्र के ओंठ ।।  
हेमराज हंस मैहर 

मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

नंगदांय करय का एक ठे नंगा हेर ल्या। KAVI HEMRAJ HANS

नंगदाय करय का एक ठे नंगा हेर ल्या।
कहा ठे लगामाय खै अड़ंगा हेर ल्या।।
चला तउलबाय ल्या कउनाै धर्मकांटा मा
पै ओही अँहणय का ठाहर पसंघा हेर ल्या । ।
हेमराज हंस

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।