शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

बीस जघा कर्जा किहिस,

बीस जघा कर्जा  किहिस, तब होइ सका प्रबंध। 
अपना  का  आबा   नहीं,   भोजन   मा  आनंद।।  
 
बीस जघा करजा किहिस तब भा कन्यादान। 
अपना  काही लग रहें ,सब  फीके  पकवान। । 

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023

वा रिमही के शम्भू का, नमन है बारम्बार।

 

जहां बघेली आय के, होइगै अगम दहार।
वा रिमही के शम्भू का, नमन है बारम्बार।
बघेली साहित्त के, शम्भू काकू सिंध।
देह धरे गाबत रहा, मानो कबिता बिंध। ।
गांव गली चउपाल तक, जेखर बानी गूंज।
श्री काकू जी अमर भें, ग्राम गिरा का पूज। ।
लिहे घोटनी चल परैं, जब कबिता के संत।
सब कवि काकू का कहैं, रिमही केर महंत। ।
जेखे कबिता के बिषय, आंसू आह कराह।
अच्छर फरयादी बने, काकू खुदै गबाह। ।
आंखर आंखर मा बसय,काकू कै कहनूत।
हंस बंदना कइ रहा, धन्न बघेली पूत। ।

अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै

 

अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै
औ बोर करत बेरिया खासा शोर ह्वाथै।।
उइ पाले रहय तीतुर चमगादर औ अरुआ
आपन ता रास्ट्रीय पच्छी सुघर मोर ह्वाथै। ।
आमा फल का राजा यमै कउनव सक नहीं
पै ओहू माही थोर काहि तोर ह्वाथै। ।
एक दूसरे का उइ खुब कहैं चोट्टा
जे पकड़ जाय जाहिर वहै चोर ह्वाथै। ।
रूख मा मिठास ही हराथै पीलिया
पै ओहू मा गठान पोर-- पोर ह्वाथै। ।
"हंस" वा गरीब पै ईमानदार है
रिनिहा निता पइसा मुँहचोर ह्वाथै। ।
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आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै

 

आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै।
औ जउन बची वा तेलिआमै मा चली गै।।
तुम उनखे जिन्दगी का तजुरबा न पूंछा
रिसाय मा चली गै भंजामै मा चली गै।।
गाँव मा जबसे होरी कै डाँड़ गड़ी ही
गोरी का कबीर सुनामै मा चली गै।।
छूला ता खूब फूला डोंगरी पहार मा
पै कनैर का गुलाब बनामै मा चली गै।।
फगुआ का मिली हंस ता अबीर लगाउब
जेही मन मा दबी बात बतामै मा चली गै।।
@हेमराज हंस भेड़ा

मूड़ घोटाये भर से कोउ लामा नहीं बनै।

 

मूड़ घोटाये भर से कोउ लामा नहीं बनै।
जइसा हर गरीब सुदामा नहीं बनै। ।
उनहूँ मा छबि देखा अब्दुल कलाम कै
सब कोउ आताताई ओसामा नहीं बनै। ।
@हेमराज हंस भेड़ा

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।