बीस जघा कर्जा किहिस, तब होइ सका प्रबंध।
अपना का आबा नहीं, भोजन मा आनंद।।
बीस जघा करजा किहिस तब भा कन्यादान।
अपना काही लग रहें ,सब फीके पकवान। ।
बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
जो अर्चन जीवनभर ज़हर पीता रहा, उसे साँप के ज़हर ने मार दिया जिसने जीवन भर ज़माने का ज़हर पीया। जिसे परिवार, समाज, अपने-पराये सब डसते रहे, ...