नंगदाय करय का एक ठे नंगा हेर ल्या।
कहा ठे लगामाय खै अड़ंगा हेर ल्या।।
चला तउलबाय ल्या कउनाै धर्मकांटा मा
पै ओही अँहणय का ठाहर पसंघा हेर ल्या । ।
हेमराज हंस
बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
जो अर्चन जीवनभर ज़हर पीता रहा, उसे साँप के ज़हर ने मार दिया जिसने जीवन भर ज़माने का ज़हर पीया। जिसे परिवार, समाज, अपने-पराये सब डसते रहे, ...
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