बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
रविवार, 15 अक्टूबर 2023
सोमवार, 3 अप्रैल 2023
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : हमहूं तोहरे साथ हयन ननकाना माँगा तुम। ।
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : हमहूं तोहरे साथ हयन ननकाना माँगा तुम। ।: हिसाब पाई पाई आना आना माँगा तुम। आपन धरती आपन भेस बाना माँगा तुम।। खालिस्तान कई साध ता कबहूं पूर न होइ हमहूं तोहरे साथ हयन न...
शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023
बीस जघा कर्जा किहिस,
बीस जघा कर्जा किहिस, तब होइ सका प्रबंध।
अपना का आबा नहीं, भोजन मा आनंद।।
बीस जघा करजा किहिस तब भा कन्यादान।
अपना काही लग रहें ,सब फीके पकवान। ।
गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023
वा रिमही के शम्भू का, नमन है बारम्बार।
जहां बघेली आय के, होइगै अगम दहार।
वा रिमही के शम्भू का, नमन है बारम्बार।।
बघेली साहित्त के, शम्भू काकू सिंध।
देह धरे गाबत रहा, मानो कबिता बिंध। ।
लिहे घोटनी चल परैं, जब कबिता के संत।
सब कवि काकू का कहैं, रिमही केर महंत। ।
जेखे कबिता के बिषय, आंसू आह कराह।
अच्छर फरयादी बने, काकू खुदै गबाह। ।
आंखर आंखर मा बसय,काकू कै कहनूत।
हंस बंदना कइ रहा, धन्न बघेली पूत। ।
अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै
अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै।
औ बोर करत बेरिया खासा शोर ह्वाथै।।
उइ पाले रहय तीतुर चमगादर औ अरुआ
आपन ता रास्ट्रीय पच्छी सुघर मोर ह्वाथै। ।
एक दूसरे का उइ खुब कहैं चोट्टा
जे पकड़ जाय जाहिर वहै चोर ह्वाथै। ।
रूख मा मिठास ही हराथै पीलिया
पै ओहू मा गठान पोर-- पोर ह्वाथै। ।
"हंस" वा गरीब पै ईमानदार है
रिनिहा निता पइसा मुँहचोर ह्वाथै। ।
सभी रिएक्शन:
67आप, Kavi Satendra Pandey, Madhu Madhvi और 64 अन्य लोगआधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै
आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै।
औ जउन बची वा तेलिआमै मा चली गै।।
तुम उनखे जिन्दगी का तजुरबा न पूंछा
रिसाय मा चली गै भंजामै मा चली गै।।
छूला ता खूब फूला डोंगरी पहार मा
पै कनैर का गुलाब बनामै मा चली गै।।
फगुआ का मिली हंस ता अबीर लगाउब
जेही मन मा दबी बात बतामै मा चली गै।।
@हेमराज हंस भेड़ा
मूड़ घोटाये भर से कोउ लामा नहीं बनै।
मूड़ घोटाये भर से कोउ लामा नहीं बनै।
जइसा हर गरीब सुदामा नहीं बनै। ।
उनहूँ मा छबि देखा अब्दुल कलाम कै
सब कोउ आताताई ओसामा नहीं बनै। ।
@हेमराज हंस भेड़ा
शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
आबा बसन्त स्वागत
आबा बसन्त स्वागत है पै ठूंठ बचा है।
अपना के अपमान का घूंट बचा है।।
अपना के अपमान का घूंट बचा है।।
धूर धुँआ धुंध से गाँव खाँसा थें
मन के परदूसन का मूंठ बचा है। ।
रीमा सीधी सतना सहडोल कोल डारिन
अब फलाने कहाथें चित्रकूट बचा है।।
भुंइ का करेजा तक बेंच खा लिहिन ता
धरती के गहिर घाव चारिव खूंट बचा है।।
परियाबरन जिन्दा है हजूर के बइठक मा
बन बासी जीव केर जटा जूट बचा है।।
साम्हर सेर हिरन ता सरकस मा देख ल्या
हंस नदी तीर रोबत ऊंट बचा है। ।
हेमराज हंस - भेड़ा
मन के परदूसन का मूंठ बचा है। ।
रीमा सीधी सतना सहडोल कोल डारिन
अब फलाने कहाथें चित्रकूट बचा है।।
भुंइ का करेजा तक बेंच खा लिहिन ता
धरती के गहिर घाव चारिव खूंट बचा है।।
परियाबरन जिन्दा है हजूर के बइठक मा
बन बासी जीव केर जटा जूट बचा है।।
साम्हर सेर हिरन ता सरकस मा देख ल्या
हंस नदी तीर रोबत ऊंट बचा है। ।
हेमराज हंस - भेड़ा
नये साल कै बधाई
हम दयन नये साल कै बधाई।
फलनिया कहिस तोहइ लाज नहीं आई।।
पाँव हें जोंधइया मा हाथे परमानु बम
पै देस मा घ्रिना कै खासा जबर खाई। ।
हेमराज हंस भेड़ा मइहर
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