मंगलवार, 27 जनवरी 2026

हंस कै जरुरत नहीं

हंस  कै जरुरत  नहीं  उनही  ता  सुआ चाही। 
रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक  खुआ चाही।। 

बेमारी से  हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर 
बे असर  दबा  हैं  ता   रोगी का दुआ   चाही। । 

हांथी अस तरक्की देखि के भोकैं लगें कूकुर कस 
अइसै सब के जीमन मा झरहा  जरतुआ चाही।।

भला बताबा गूलर का ज्वार भाटा से का मतलब 
ओही ता गुजर के निता बस  एकठे  कुआं चाही।। 

घुप्प अँधिआर  होइ  गा कइसा  भरी दुपहरी मा 
कस्यप से कहिद्या  हंस   सुरिज का उआ चाही। । 
हेमराज हंस 
 

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