बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
मंगलवार, 27 जनवरी 2026
हंस कै जरुरत नहीं
शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025
का बताई की कहां कहां पिरात है
शनिवार, 11 अक्टूबर 2025
हे सारद माई करउँ चेरउरी।
हे सारद माई करउँ चेरउरी।
तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।
नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।
कबि अस मोरे नहीं आचरन। ।
अइगुन करत बीत मोरी अउरी।
हमूं का आसिरबाद दे मइय्या।
बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।।
हे हँसबाहिनी ग्यान कै गउरी ।
सब काही तैं दिहे बुद्धि बर।
मोर तोरे चरनन मा है घर। ।
तउअव मोर मती ही बउरी।
कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा।
धोबर जाय पाखण्ड औ इरखा।।
हंस के हिदय बना ले चउरी।
हेमराज हंस
हे सारद माई करउँ चेरउरी
गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025
म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर महंती देखि के
सोमवार, 17 मार्च 2025
आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे।
रविवार, 7 अप्रैल 2024
जउन बोया वा काटा भाई।
जउन बोया वा काटा भाई।
अब काहे का घाटा भाई।।
जर्जर पोथी ही चरित्त कै
वमै चढ़ा ल्या गाता भाई।।
भया सुखे दुःख ठाढ़ न कबहूं
तब काहे का नाता भाई। ।
बड़े सत्तबादी बक्ता हा
पुन थूंका पुन चाटा भाई।।
आजु हबै मुँह जउकी का जउका
काल्ह कटी पुन लाटा भाई। ।
काहु का परथन कहूं समर्थन
आपन मतलब सांटा भाई।।
ऐसी कूलर अपना का सुभ
"हँस" के है फर्राटा भाई। ।
हेमराज हँस --9575287490
सोमवार, 1 अप्रैल 2024
सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है।
सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है।
औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।।
कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ
पाथर मा रसरी का घट्टा बना है।।
उनहिन के खातिर ही रेशम अउ मलमल
हमरे निता केबल लठ्ठा बना है। ।
उइ चाह भले दिन भर मोबाइल चलामय
वा गोमा बना लइस ता हले चठ्ठा बना है।।
कबहूं ता हमरिव समय बहुरी निकहा
लगाये अड़ाउसा या पट्ठा बना है। ।
पीरा का अपने गुहे 'हंस' बइठ हें
भितर गुल्ल धंधकत एक भट्ठा बना है।।
हेमराज हंस
शुक्रवार, 22 मार्च 2024
हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा। येसे आदर अपना जइसा नहीं रहा।।
गुरुवार, 21 मार्च 2024
मइहर है जहां बिद्या कै देवी
गुरुवार, 14 मार्च 2024
कवि होय के शक मा मिला है।। DAHIJAR
गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023
अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै
आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै
शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
आबा बसन्त स्वागत
अपना के अपमान का घूंट बचा है।।
मन के परदूसन का मूंठ बचा है। ।
रीमा सीधी सतना सहडोल कोल डारिन
अब फलाने कहाथें चित्रकूट बचा है।।
भुंइ का करेजा तक बेंच खा लिहिन ता
धरती के गहिर घाव चारिव खूंट बचा है।।
परियाबरन जिन्दा है हजूर के बइठक मा
बन बासी जीव केर जटा जूट बचा है।।
साम्हर सेर हिरन ता सरकस मा देख ल्या
हंस नदी तीर रोबत ऊंट बचा है। ।
हेमराज हंस - भेड़ा
मंगलवार, 13 सितंबर 2022
सोमवार, 2 नवंबर 2015
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। ।
झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा।
गरीबन का है नाव नही पवित्र गरीबी रेखा मा। ।
चाहे जउन गरीब होय पै सबकै समिस्या एक ही।
सबके आँसू अंतस पीरा केर तपिस्या एक ही। ।
राजनीत सब दिन चटिस ही पूंजी पति के तरबा।
औ गरीब के घर का लाइस अपनेन घर का कोरबा। ।
राजनीत का लखा कपट छल की ही केत्ती सूध।
हमरे घर मा दारू बांटै अपने घर मा दूध। ।
पी पी दूध भै राजनीत य देखा केतनी मोट।
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
हेमराज हंस ----
भूंखा टोरबा सोयगा,
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
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बघेली कविता आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे। जुजबी नहीं दोउ जूना देखाई थे। । चपरासी के भरती मा इंजीनियर ठाढ़ हें देस मा ...
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नारी के सम्मान से,सम्बत कै सुरुआत। दुनिआ का संदेस है, भारत का नवरात। ।
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केत्तव पुरखा गुजरिगें, मन मा लये रहस्स। बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।। अपने भुंइ मा राम जू , मना रहे हें पर्ब । ...


