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मंगलवार, 27 जनवरी 2026

हंस कै जरुरत नहीं

हंस  कै जरुरत  नहीं  उनही  ता  सुआ चाही। 
रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक  खुआ चाही।। 

बेमारी से  हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर 
बे असर  दबा  हैं  ता   रोगी का दुआ   चाही। । 

हांथी अस तरक्की देखि के भोकैं लगें कूकुर कस 
अइसै सब के जीमन मा झरहा  जरतुआ चाही।।

भला बताबा गूलर का ज्वार भाटा से का मतलब 
ओही ता गुजर के निता बस  एकठे  कुआं चाही।। 

घुप्प अँधिआर  होइ  गा कइसा  भरी दुपहरी मा 
कस्यप से कहिद्या  हंस   सुरिज का उआ चाही। । 
हेमराज हंस 
 

शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

का बताई की कहां कहां पिरात है

 बघेली कबिता 
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का   बताई   की   कहां    कहां   पिरात  है। 
बैचैन  हबै  जिउ  मन   बूढ़त   उतरात  है।। 
 
उनखर फरक रही ही सकारे से बायीं आँख
पलकैं लगउतीं लूसी  ता  काजर सुगात है।।

वाठर  बनाउत    तक   ता  उनसे  नहीं बनै 
लबरी   बता   रहे   हें  अमल्लक   जनात है ।।

उनखे  चिकोटी  चींथे  कै चिन्हारी  बनी  ही 
आँखी  मा  उनखे   प्रेम  केर  जल प्रप्रात है।।

पाबन   पुनीत  प्रीत   कै  पूजा  यतर  ही  हंस 
तुलसी के चउरा  का दिआ  जस टिमटिमात है।।
हेमराज हंस

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

हे सारद माई करउँ चेरउरी।


 हे  सारद माई  करउँ चेरउरी। 

तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।


नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।

कबि अस  मोरे नहीं आचरन।  ।

अइगुन करत बीत मोरी अउरी। 


हमूं का आसिरबाद दे  मइय्या। 

बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।। 

हे हँसबाहिनी ग्यान कै  गउरी । 


सब काही तैं   दिहे बुद्धि बर। 

मोर  तोरे  चरनन  मा  है  घर। । 

तउअव  मोर मती ही बउरी। 


कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा। 

धोबर जाय  पाखण्ड औ  इरखा।।  

हंस के  हिदय  बना ले चउरी। 

हेमराज हंस 

हे सारद माई करउँ चेरउरी

हे  सारद माई  करउँ चेरउरी। 
तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।

नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।
कबि अस  मोरे नहीं आचरन।  ।
अइगुन करत बीत मोरी अउरी। 

हमूं का आसिरबाद दे  मइय्या। 
बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।। 
हे हँसबाहिनी ग्यान कै  गउरी । 

अनगइयन का दिहे बुद्धि बर। 
मोर  तोरे  चरनन  मा  है  घर। । 
तउअव  मोर मती ही बउरी। 

कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा। 
धोबर जाय  पाखण्ड औ  इरखा।।  
हंस के  हिदय  बना ले चउरी। 
हेमराज हंस 

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर महंती देखि के

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर   महंती देखि के। 
पै अपनौ पचे  मउन हन उनखर  कुसंती देखि के।। 

ना  राम  रमउहाल  ना  साहब  सलाम  पैलगी 
हम ता चउआन हन  इरखा कै खंती  देखि के।। 

आसा  ही  राम दै की   बहुरिहैं  अपनव  दिन
 मरय का मन परा थै उनखर जयंती देखि के।। 

केतनेव  क्वारा उजरि  गें  नकली  दबाई मा 
पुलिस लउट आयी गरे मा  बैजन्ती देखि के।। 

फुर कहब  ता  हंस  करू सब दिना रहब 
चुआ थी   लार  इंद्र कै  दमयंती   देखि के।। 
हेमराज हंस  

सोमवार, 17 मार्च 2025

आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे।

 बघेली कविता 
आबा  उनखे  बेलहरा का चूना देखाई थे। 
जुजबी  नहीं   दोउ    जूना     देखाई थे। । 

चपरासी के भरती मा  इंजीनियर ठाढ़ हें 
देस मा  बेरोजगारी का नमूना  देखाई थे। । 

अब एक डालर मा  सतासी का  अबरेज है 
फुक्क फुक्क   करत  वा लूना देखाई थे। । 

 गुंगुआत गोइआरो  मची  गाँव  मा गोहार 
बस्ती का  बियाबान अस सूना  देखाई थे। । 


बरायन  नसाय  गै   कलस  के प्रेम मा 
ओखे  कला  का    गोठा  गूना  देखाई   थे। । । । 
हेमराज हंस - भेड़ा  मैहर 

रविवार, 7 अप्रैल 2024

जउन बोया वा काटा भाई।

 जउन   बोया  वा  काटा  भाई। 

अब   काहे    का   घाटा  भाई।।


जर्जर   पोथी   ही  चरित्त कै 

वमै   चढ़ा   ल्या  गाता भाई।।


भया  सुखे  दुःख ठाढ़ न कबहूं  

तब    काहे   का   नाता  भाई। ।


बड़े    सत्तबादी    बक्ता    हा

पुन  थूंका   पुन  चाटा   भाई।।


आजु हबै मुँह जउकी का जउका   

काल्ह  कटी  पुन  लाटा भाई। । 


काहु  का परथन कहूं समर्थन 

आपन  मतलब    सांटा  भाई।।


ऐसी   कूलर  अपना  का  सुभ 

"हँस"   के   है  फर्राटा    भाई।  ।

हेमराज हँस --9575287490 


सोमवार, 1 अप्रैल 2024

सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है।

 


सगलेहार  उनहिन  का   पट्टा बना है। 

औ   हमरे  खातिर    सिंगट्टा  बना है।। 


कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ

पाथर   मा   रसरी   का  घट्टा  बना है।।

 

उनहिन के खातिर ही रेशम अउ मलमल 

हमरे  निता  केबल  लठ्ठा   बना    है। । 


उइ चाह भले दिन भर मोबाइल चलामय  

वा गोमा बना  लइस  ता हले चठ्ठा बना है।।  


कबहूं ता हमरिव समय बहुरी निकहा 

लगाये  अड़ाउसा  या  पट्ठा  बना  है। । 


पीरा  का  अपने  गुहे  'हंस'  बइठ  हें 

भितर गुल्ल धंधकत एक भट्ठा बना है।। 

हेमराज हंस  

शुक्रवार, 22 मार्च 2024

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा। येसे आदर अपना जइसा नहीं रहा।।

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा।
येसे आदर अपना के जइसा नहीं रहा।।
बब्बा हें चउआन चकाचउध देख के
कहिन कि समय फूहर अइसा नहीं रहा।।
क्वामर कलाई गोरी कै तउ चूरी चटकिगै
हमरे जनम दिन का सतइसा नहीं रहा।।
फलानिया तारा दइके मइके चली गै
जबकी हमार कउनव खोड़इसा नहीं रहा। ।
लाजा ढीठी राम रामउहल ता होथी
पै हंस का ठिकाना रहइसा नहीं रहा। ।
हेमराज हंस

गुरुवार, 21 मार्च 2024

मइहर है जहां बिद्या कै देवी

 मइहर है जहां बिद्या कै देवी
बिराजी मा शारद शक्ति भवानी।
पहिलय पूजा करय नित आल्हा
ता देवी के बर से बना बरदानी।।
मइहर है जहाँ लिलजी के तट
गोला मठ मा हैं औघड़ दानी।
मइहर है जहाँ संगम है सुर
सरगम कै झंकार सुहानी। ।
*********************
मइहर है जहाँ भक्ति क रेला है
श्रद्धा औ बिस्वास का मेला।
जग जननी के दरशन खातिर
धाबत जग नव रातरि बेला। ।
काहु के हाथ मा सेंदुर फूटा है
काहू के हाथे मा नरियर भेला।
कोउ चढ़ाबत मेबा मिठाई
कोउ चढ़ाबत फूल औ केला। ।
***********************
मइहर है जहाँ रामसखा जू का
आश्रम गुरुकुल बिद्याधानी।
बेद बिद्यालय मा वेद ऋचा पढ़ि
बालक ग्यानी बनैं बिग्यानी।।
ओइला मा मन केर कोइला हो उज्जर
मन बच कर्म लगाबै जे प्रानी।
हंस पुनीत या मइहर धाम का
शत शत बंदन चंदन पानी। ।
@हेमराज हंस भेड़ा मैहर
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गुरुवार, 14 मार्च 2024

कवि होय के शक मा मिला है।। DAHIJAR

 या  जउन  हमी  तकमा मिला है। 
कवि   होय  के  शक मा  मिला है।।
 
होरी   के   फगुहार   बताउथें  कि 
या   बम   चका  चक मा  मिला है। । 

 कोउ  ता  अजल्याम  बताउत थै 
कोउ   कहा  थै  हक  मा मिला है। । 

उइ  रोज  सकारे मंदिर मा मिला थें 
जब से मालदार मोहकमा मिला है।। 

अब प्याज बोये मा  अफीम जमा थी 
बीज राजनीत  के चकमा मा मिला है। ।
 
 वा हंस गा तै रोजी रोटी के तलाश मा 
जेखर आधार काड काल्ह ट्रक मा  मिला है 
✍️हेमराज हंस

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2023

अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै

 

अब कोउ कुआं खनाबय नहीं बोर ह्वाथै
औ बोर करत बेरिया खासा शोर ह्वाथै।।
उइ पाले रहय तीतुर चमगादर औ अरुआ
आपन ता रास्ट्रीय पच्छी सुघर मोर ह्वाथै। ।
आमा फल का राजा यमै कउनव सक नहीं
पै ओहू माही थोर काहि तोर ह्वाथै। ।
एक दूसरे का उइ खुब कहैं चोट्टा
जे पकड़ जाय जाहिर वहै चोर ह्वाथै। ।
रूख मा मिठास ही हराथै पीलिया
पै ओहू मा गठान पोर-- पोर ह्वाथै। ।
"हंस" वा गरीब पै ईमानदार है
रिनिहा निता पइसा मुँहचोर ह्वाथै। ।
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आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै

 

आधी उमिर ता गरिआमै मा चली गै।
औ जउन बची वा तेलिआमै मा चली गै।।
तुम उनखे जिन्दगी का तजुरबा न पूंछा
रिसाय मा चली गै भंजामै मा चली गै।।
गाँव मा जबसे होरी कै डाँड़ गड़ी ही
गोरी का कबीर सुनामै मा चली गै।।
छूला ता खूब फूला डोंगरी पहार मा
पै कनैर का गुलाब बनामै मा चली गै।।
फगुआ का मिली हंस ता अबीर लगाउब
जेही मन मा दबी बात बतामै मा चली गै।।
@हेमराज हंस भेड़ा

शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

आबा बसन्त स्वागत

 आबा  बसन्त  स्वागत है पै ठूंठ बचा है।
अपना  के  अपमान  का  घूंट बचा है।।
 
धूर   धुँआ   धुंध   से   गाँव    खाँसा  थें
मन   के  परदूसन का  मूंठ  बचा  है। ।
 
रीमा सीधी सतना सहडोल कोल डारिन  
अब  फलाने कहाथें  चित्रकूट बचा है।।

भुंइ  का करेजा तक बेंच खा लिहिन ता
धरती के गहिर घाव चारिव खूंट बचा है।।

परियाबरन जिन्दा है हजूर के बइठक मा
बन बासी  जीव  केर  जटा  जूट बचा है।।

साम्हर  सेर हिरन ता सरकस मा देख ल्या
हंस नदी   तीर   रोबत   ऊंट   बचा   है। ।
हेमराज हंस - भेड़ा

मंगलवार, 13 सितंबर 2022

शहर मा जाके रहय लाग जब से आपन गाँव। भरी दुपहरी आँधर होइगै लागड़ होइ गै छाँव। । गाँवन कै इतिहास बन गईं अब पनघट कै गगरी। थरी कोनइता मूसर ज्यतबा औ कांडी कै बगरी। । गड़ा बरोठे किलबा सोचइ पारी आबै माव । हसिया सोचै अब कब काटब हम चारा का ज्यांटा। सोधई दोहनिया मा नहि बाजै अब ता दूध का स्यांटा। । काकू डेरी माही पूंछै दूध दही का भाव। दुर्घट भै बन बेर बिही औ जामुन पना अमावट। ''राजनीत औ अपराधी ''अस सगली हाट मिलावट। । हत्तियार के बेईमानी मा डगमग जीवन नाँव। जब से पक्छिमहाई बइहर गाँव मा दीन्हिस खउहर। उन्हा से ता बाप पूत तक करै फलाने जउहर। । नात परोसी हितुअन तक मां एकव नही लगाव। कहै जेठानी देउरानी के देख देख के ठाठ । हम न करब गोबसहर गाँव मा तोहरे बइठै काठ। । हमू चलब अब रहब शहर मा करइ कुलाचन घाव। नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै बाती। बीत रहीं गरमी कै छुट्टी आयें न लड़िका नाती। । खेर खूंट औ कुल देउतन का अब तक परा बधाव। ममता के ओरिया से टपकें अम्माँ केर तरइना। फून किहिन न फिर के झाँकिन दादू बहू के धइन.। । यहै रंझ के बाढ़ मां हो थै लउलितियन का कटाव। शहर मा जाके ---------------------------------------- हेमराज हंस --9575287490

सोमवार, 2 नवंबर 2015

हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।

बिना धनी धोरी का है हेन निरधन अउर गरीब। 
चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। । 
झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा। 
गरीबन का है नाव नही पवित्र गरीबी रेखा मा। । 
चाहे जउन गरीब होय पै सबकै समिस्या एक ही। 
सबके आँसू  अंतस पीरा केर तपिस्या एक ही। । 
राजनीत सब दिन चटिस ही पूंजी पति के तरबा। 
औ गरीब के घर का लाइस अपनेन घर का कोरबा। । 
राजनीत का लखा कपट छल की ही केत्ती सूध। 
हमरे घर मा दारू  बांटै अपने घर मा दूध। । 
पी पी  दूध भै राजनीत य देखा केतनी मोट। 
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। । 
हेमराज हंस ----

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।