रविवार, 12 अक्टूबर 2025

शंकरलाल तिवारी जी


 पंचतत्व  में  खो  गये  , श्री  युत   शंकर लाल। 

जनहित  के  संघर्ष को,  रखेगा विन्ध्य सभाल।।  


कौन !  सुनेगा ! अब यहाँ,  दीन हीन की पीर !

विन्ध्य  विदाई  दे  रहा ,    भर  नैनों   में  नीर!! 


लोकतंत्र  जन कंठ की , बन कर रहे अवाज। 

जनता के दिल में किया लोक रत्न  ने राज।।  


शोक ! छा  गया विन्ध्य में, थमी समय की चाल!

सादर  है श्रद्धांजली ,  हे! जन नायक   लाल !!  

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भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।