हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज।
ईश्वर कै आराधना अलग अलग अंदाज।।
पण्डा बइठ देवार मा बजै नगरिया झांझ।
हांक परी ओच्छा मोरी गूँजे नौ दिन साँझ।।
जबा देबारे बोबरि गा होय हूम अस्थान।
संझा से लै रात तक मढ़ई भगत कै तान।।
बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
जो अर्चन जीवनभर ज़हर पीता रहा, उसे साँप के ज़हर ने मार दिया जिसने जीवन भर ज़माने का ज़हर पीया। जिसे परिवार, समाज, अपने-पराये सब डसते रहे, ...
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