बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
सोमवार, 3 अप्रैल 2023
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : हमहूं तोहरे साथ हयन ननकाना माँगा तुम। ।
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : हमहूं तोहरे साथ हयन ननकाना माँगा तुम। ।: हिसाब पाई पाई आना आना माँगा तुम। आपन धरती आपन भेस बाना माँगा तुम।। खालिस्तान कई साध ता कबहूं पूर न होइ हमहूं तोहरे साथ हयन न...
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
archan namn
जो अर्चन जीवनभर ज़हर पीता रहा, उसे साँप के ज़हर ने मार दिया जिसने जीवन भर ज़माने का ज़हर पीया। जिसे परिवार, समाज, अपने-पराये सब डसते रहे, ...
-
हंस कै जरुरत नहीं उनही ता सुआ चाही। रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक खुआ चाही।। बेमारी से हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर बे असर दबा ह...
-
सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है। औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।। कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ पाथर मा रसरी का घट्ट...
-
बिना धनी धोरी का है हेन निरधन अउर गरीब। चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। । झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा। गरीबन का है न...