बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
नारी के सम्मान से,सम्बत कै सुरुआत।
दुनिआ का संदेस है, भारत का नवरात। ।
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें