जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान।
अब सत्ता का स्वाद है, खट्टा करू कसान।।
जे जनता के भाबना, केर करी तउहीन।
ता फुर माना राम दै, रही न कउनव दीन।।
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भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
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