बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान।
अब सत्ता का स्वाद है, खट्टा करू कसान।।
जे जनता के भाबना, केर करी तउहीन।
ता फुर माना राम दै, रही न कउनव दीन।।
LALLA MAHRAJ
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