केत्तव पुरखा गुजरिगें, मन मा लये रहस्स।
बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।।
अपने भुंइ मा राम जू , मना रहे हें पर्ब ।
सत्य सनातन धर्म का, आज हिदय मा गर्ब।।
आँखिन से देख्यन हमूं ,पहिल नमै तिथि जोग।
खूब सराही भाग का , हम भारत के लोग। ।
कुछ जन मुंह ओरमा लइन, देख के अबध उराव।
जे भारत के पर्ब से, राखंय कपट दुराव।।
हमहूं साक्षी बन गयन, समय लइस जब मोड़।
पूरी दुनिया का दिहिस, श्री राघव से जोड़।।
राम देस कै आतिमा, राम देस के प्रान ।
अपने भारत देस कै, रामै से पहिचान ।।
हेमराज हंस

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