भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह।
महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
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चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।
मीठ खूब खाइन ता फंस गें मधुमेह मा।।
राजा मांडा घाई हाल होइहैं हजूर के
कमंडल फेकय लागें मण्डल के नेह मा।।
हेमराज हंस
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।