गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर महंती देखि के

म ता बेलकुल चुप्प हन उनखर   महंती देखि के। 
पै अपनौ पचे  मउन हन उनखर  कुसंती देखि के।। 

ना  राम  रमउहाल  ना  साहब  सलाम  पैलगी 
हम ता चउआन हन  इरखा कै खंती  देखि के।। 

आसा  ही  राम दै की   बहुरिहैं  अपनव  दिन
 मरय का मन परा थै उनखर जयंती देखि के।। 

केतनेव  क्वारा उजरि  गें  नकली  दबाई मा 
पुलिस लउट आयी गरे मा  बैजन्ती देखि के।। 

फुर कहब  ता  हंस  करू सब दिना रहब 
चुआ थी   लार  इंद्र कै  दमयंती   देखि के।। 
हेमराज हंस  

सोमवार, 17 मार्च 2025

नवा साल

 भारत के नेरे यजु साम ॠगु अथर्व है।

अपने परिपाटी का हमीं बड़ा गर्व है ।।
कोट कोट बधाई अपना का देस बासिव
आजु अपने देस का नवा साल पर्व है ।।

आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे।

 बघेली कविता 
आबा  उनखे  बेलहरा का चूना देखाई थे। 
जुजबी  नहीं   दोउ    जूना     देखाई थे। । 

चपरासी के भरती मा  इंजीनियर ठाढ़ हें 
देस मा  बेरोजगारी का नमूना  देखाई थे। । 

अब एक डालर मा  सतासी का  अबरेज है 
फुक्क फुक्क   करत  वा लूना देखाई थे। । 

 गुंगुआत गोइआरो  मची  गाँव  मा गोहार 
बस्ती का  बियाबान अस सूना  देखाई थे। । 


बरायन  नसाय  गै   कलस  के प्रेम मा 
ओखे  कला  का    गोठा  गूना  देखाई   थे। । । । 
हेमराज हंस - भेड़ा  मैहर 

मंगलवार, 16 अप्रैल 2024

खूब सराही भाग का , हम भारत के लोग

 केत्तव पुरखा  गुजरिगें, मन  मा  लये रहस्स।  
बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।। 
 
अपने  भुंइ  मा  राम जू , मना  रहे  हें पर्ब ।
सत्य सनातन धर्म का, आज हिदय मा गर्ब।। 
 
आँखिन से देख्यन हमूं ,पहिल नमै तिथि जोग।
खूब  सराही   भाग का , हम  भारत  के  लोग। । 

कुछ जन मुंह ओरमा लइन, देख के अबध उराव।
जे   भारत    के  पर्ब से,    राखंय     कपट   दुराव।। 

हमहूं साक्षी बन गयन, समय लइस जब मोड़। 
पूरी  दुनिया  का  दिहिस, श्री राघव  से  जोड़।।  

राम देस कै आतिमा, राम देस के प्रान ।
अपने भारत देस कै, रामै से पहिचान ।।
हेमराज हंस 


बुधवार, 10 अप्रैल 2024

SAMDHI SAHEB SHRI YUT TIWARI JU


 

हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज।

 हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज। 

ईश्वर कै आराधना अलग अलग अंदाज।। 


पण्डा बइठ देवार मा बजै नगरिया झांझ। 

हांक परी ओच्छा मोरी गूँजे नौ दिन साँझ।। 


जबा देबारे बोबरि गा होय हूम अस्थान। 

संझा से लै रात तक मढ़ई भगत कै तान।। 

खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान

 जीबन  के  हर  पक्ष  का,जे  दे  सरल निदान। 

खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान।।


लगी  रही  जब  देस  मा, गरिआमै  कै  रयाव।

ता  न किहा  आलोचना, औ न दीन्हया ठयाव।।


डेंगू अउर  मलेरिया,  कह्या  तु  ऊल जलूल। 

वा तोहरे अपमान का, सकब  न हरबी भूल।। 

हेमराज हंस   

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।