बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
सोमवार, 17 मार्च 2025
आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे।
मंगलवार, 16 अप्रैल 2024
खूब सराही भाग का , हम भारत के लोग
बुधवार, 10 अप्रैल 2024
हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज।
हम आपन पूजा करी औ उइ पढ़ै नमाज।
ईश्वर कै आराधना अलग अलग अंदाज।।
पण्डा बइठ देवार मा बजै नगरिया झांझ।
हांक परी ओच्छा मोरी गूँजे नौ दिन साँझ।।
जबा देबारे बोबरि गा होय हूम अस्थान।
संझा से लै रात तक मढ़ई भगत कै तान।।
खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान
जीबन के हर पक्ष का,जे दे सरल निदान।
खखरी भुंडी तक किहिन,मानस का अपमान।।
लगी रही जब देस मा, गरिआमै कै रयाव।
ता न किहा आलोचना, औ न दीन्हया ठयाव।।
डेंगू अउर मलेरिया, कह्या तु ऊल जलूल।
वा तोहरे अपमान का, सकब न हरबी भूल।।
हेमराज हंस
सोमवार, 8 अप्रैल 2024
रविवार, 7 अप्रैल 2024
जउन बोया वा काटा भाई।
जउन बोया वा काटा भाई।
अब काहे का घाटा भाई।।
जर्जर पोथी ही चरित्त कै
वमै चढ़ा ल्या गाता भाई।।
भया सुखे दुःख ठाढ़ न कबहूं
तब काहे का नाता भाई। ।
बड़े सत्तबादी बक्ता हा
पुन थूंका पुन चाटा भाई।।
आजु हबै मुँह जउकी का जउका
काल्ह कटी पुन लाटा भाई। ।
काहु का परथन कहूं समर्थन
आपन मतलब सांटा भाई।।
ऐसी कूलर अपना का सुभ
"हँस" के है फर्राटा भाई। ।
हेमराज हँस --9575287490
भूंखा टोरबा सोयगा,
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
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बघेली कविता आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे। जुजबी नहीं दोउ जूना देखाई थे। । चपरासी के भरती मा इंजीनियर ठाढ़ हें देस मा ...
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नारी के सम्मान से,सम्बत कै सुरुआत। दुनिआ का संदेस है, भारत का नवरात। ।
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केत्तव पुरखा गुजरिगें, मन मा लये रहस्स। बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।। अपने भुंइ मा राम जू , मना रहे हें पर्ब । ...

