नारी के सम्मान से,सम्बत कै सुरुआत।
दुनिआ का संदेस है, भारत का नवरात। ।
बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
जउन बोया वा काटा भाई।
अब काहे का घाटा भाई।।
जर्जर पोथी ही चरित्त कै
वमै चढ़ा ल्या गाता भाई।।
भया सुखे दुःख ठाढ़ न कबहूं
तब काहे का नाता भाई। ।
बड़े सत्तबादी बक्ता हा
पुन थूंका पुन चाटा भाई।।
आजु हबै मुँह जउकी का जउका
काल्ह कटी पुन लाटा भाई। ।
काहु का परथन कहूं समर्थन
आपन मतलब सांटा भाई।।
ऐसी कूलर अपना का सुभ
"हँस" के है फर्राटा भाई। ।
हेमराज हँस --9575287490
जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान।
अब सत्ता का स्वाद है, खट्टा करू कसान।।
जे जनता के भाबना, केर करी तउहीन।
ता फुर माना राम दै, रही न कउनव दीन।।
श्री राघव जू खुद कहिन, तमिलनाडु मा साफ।
जे अइ उनखे सरन मा, सगले अइगुन माफ।।
हेमराज हँस
औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।।
कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ
पाथर मा रसरी का घट्टा बना है।।
उनहिन के खातिर ही रेशम अउ मलमल
हमरे निता केबल लठ्ठा बना है। ।
उइ चाह भले दिन भर मोबाइल चलामय
वा गोमा बना लइस ता हले चठ्ठा बना है।।
कबहूं ता हमरिव समय बहुरी निकहा
लगाये अड़ाउसा या पट्ठा बना है। ।
पीरा का अपने गुहे 'हंस' बइठ हें
भितर गुल्ल धंधकत एक भट्ठा बना है।।
हेमराज हंस
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।