रविवार, 7 अप्रैल 2024

जउन बोया वा काटा भाई।

 जउन   बोया  वा  काटा  भाई। 

अब   काहे    का   घाटा  भाई।।


जर्जर   पोथी   ही  चरित्त कै 

वमै   चढ़ा   ल्या  गाता भाई।।


भया  सुखे  दुःख ठाढ़ न कबहूं  

तब    काहे   का   नाता  भाई। ।


बड़े    सत्तबादी    बक्ता    हा

पुन  थूंका   पुन  चाटा   भाई।।


आजु हबै मुँह जउकी का जउका   

काल्ह  कटी  पुन  लाटा भाई। । 


काहु  का परथन कहूं समर्थन 

आपन  मतलब    सांटा  भाई।।


ऐसी   कूलर  अपना  का  सुभ 

"हँस"   के   है  फर्राटा    भाई।  ।

हेमराज हँस --9575287490 


शनिवार, 6 अप्रैल 2024

जब परछन भै अबध कै

 जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान। 

अब सत्ता  का स्वाद है,  खट्टा करू कसान।।  

जे जनता  के  भाबना, केर  करी  तउहीन। 

ता फुर माना राम दै, रही  न कउनव दीन।।  

सगले अइगुन माफ

 श्री राघव जू खुद कहिन, तमिलनाडु मा साफ। 

जे अइ उनखे  सरन मा, सगले अइगुन  माफ।।  

हेमराज हँस 

बुधवार, 3 अप्रैल 2024

डारी सब जन बोट।

 जनता से बिनती हिबय, डारी  सब जन बोट। 
जिव निछोह बिदुरा सकैं, लोकतंत्र के ओंठ ।।  
हेमराज हंस मैहर 

मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

नंगदांय करय का एक ठे नंगा हेर ल्या। KAVI HEMRAJ HANS

नंगदाय करय का एक ठे नंगा हेर ल्या।
कहा ठे लगामाय खै अड़ंगा हेर ल्या।।
चला तउलबाय ल्या कउनाै धर्मकांटा मा
पै ओही अँहणय का ठाहर पसंघा हेर ल्या । ।
हेमराज हंस

सोमवार, 1 अप्रैल 2024

सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है।

 


सगलेहार  उनहिन  का   पट्टा बना है। 

औ   हमरे  खातिर    सिंगट्टा  बना है।। 


कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ

पाथर   मा   रसरी   का  घट्टा  बना है।।

 

उनहिन के खातिर ही रेशम अउ मलमल 

हमरे  निता  केबल  लठ्ठा   बना    है। । 


उइ चाह भले दिन भर मोबाइल चलामय  

वा गोमा बना  लइस  ता हले चठ्ठा बना है।।  


कबहूं ता हमरिव समय बहुरी निकहा 

लगाये  अड़ाउसा  या  पट्ठा  बना  है। । 


पीरा  का  अपने  गुहे  'हंस'  बइठ  हें 

भितर गुल्ल धंधकत एक भट्ठा बना है।। 

हेमराज हंस  

शुक्रवार, 22 मार्च 2024

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा। येसे आदर अपना जइसा नहीं रहा।।

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा।
येसे आदर अपना के जइसा नहीं रहा।।
बब्बा हें चउआन चकाचउध देख के
कहिन कि समय फूहर अइसा नहीं रहा।।
क्वामर कलाई गोरी कै तउ चूरी चटकिगै
हमरे जनम दिन का सतइसा नहीं रहा।।
फलानिया तारा दइके मइके चली गै
जबकी हमार कउनव खोड़इसा नहीं रहा। ।
लाजा ढीठी राम रामउहल ता होथी
पै हंस का ठिकाना रहइसा नहीं रहा। ।
हेमराज हंस

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।