जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान।
अब सत्ता का स्वाद है, खट्टा करू कसान।।
जे जनता के भाबना, केर करी तउहीन।
ता फुर माना राम दै, रही न कउनव दीन।।
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जब परछन भै अबध कै, ता उइ रहें रिसान।
अब सत्ता का स्वाद है, खट्टा करू कसान।।
जे जनता के भाबना, केर करी तउहीन।
ता फुर माना राम दै, रही न कउनव दीन।।
श्री राघव जू खुद कहिन, तमिलनाडु मा साफ।
जे अइ उनखे सरन मा, सगले अइगुन माफ।।
हेमराज हँस
औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।।
कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ
पाथर मा रसरी का घट्टा बना है।।
उनहिन के खातिर ही रेशम अउ मलमल
हमरे निता केबल लठ्ठा बना है। ।
उइ चाह भले दिन भर मोबाइल चलामय
वा गोमा बना लइस ता हले चठ्ठा बना है।।
कबहूं ता हमरिव समय बहुरी निकहा
लगाये अड़ाउसा या पट्ठा बना है। ।
पीरा का अपने गुहे 'हंस' बइठ हें
भितर गुल्ल धंधकत एक भट्ठा बना है।।
हेमराज हंस
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।