शुक्रवार, 22 मार्च 2024

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा। येसे आदर अपना जइसा नहीं रहा।।

हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा।
येसे आदर अपना के जइसा नहीं रहा।।
बब्बा हें चउआन चकाचउध देख के
कहिन कि समय फूहर अइसा नहीं रहा।।
क्वामर कलाई गोरी कै तउ चूरी चटकिगै
हमरे जनम दिन का सतइसा नहीं रहा।।
फलानिया तारा दइके मइके चली गै
जबकी हमार कउनव खोड़इसा नहीं रहा। ।
लाजा ढीठी राम रामउहल ता होथी
पै हंस का ठिकाना रहइसा नहीं रहा। ।
हेमराज हंस

गुरुवार, 21 मार्च 2024

मइहर है जहां बिद्या कै देवी

 मइहर है जहां बिद्या कै देवी
बिराजी मा शारद शक्ति भवानी।
पहिलय पूजा करय नित आल्हा
ता देवी के बर से बना बरदानी।।
मइहर है जहाँ लिलजी के तट
गोला मठ मा हैं औघड़ दानी।
मइहर है जहाँ संगम है सुर
सरगम कै झंकार सुहानी। ।
*********************
मइहर है जहाँ भक्ति क रेला है
श्रद्धा औ बिस्वास का मेला।
जग जननी के दरशन खातिर
धाबत जग नव रातरि बेला। ।
काहु के हाथ मा सेंदुर फूटा है
काहू के हाथे मा नरियर भेला।
कोउ चढ़ाबत मेबा मिठाई
कोउ चढ़ाबत फूल औ केला। ।
***********************
मइहर है जहाँ रामसखा जू का
आश्रम गुरुकुल बिद्याधानी।
बेद बिद्यालय मा वेद ऋचा पढ़ि
बालक ग्यानी बनैं बिग्यानी।।
ओइला मा मन केर कोइला हो उज्जर
मन बच कर्म लगाबै जे प्रानी।
हंस पुनीत या मइहर धाम का
शत शत बंदन चंदन पानी। ।
@हेमराज हंस भेड़ा मैहर
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रविवार, 17 मार्च 2024

भीड़ टंटपालिन कै पोस्टर तमीच का ।

भीड़  टंटपालिन  कै पोस्टर तमीच का । 
छहेला का सराही की सराही बीज का। । 
अरे !  कूकूर   भले   वफादार   हो  थै 
पै ओहू के जक्शन लगा थै रेबीज़ का। । 
हेमराज हंस 

दिहा काहे खुरखुन्द।

कागा से कोयल कहिस,  दिहा काहे खुरखुन्द। 
तोहरव  प्रिय बोली लगी,  बन जा काग भुसुंड।।
 
जब  मतलब  पूछय  लगें, रामराज्ज का मित्र। 
हम निकार के धइ दिहन,अबधपुरी का चित्र।।

गुरुवार, 14 मार्च 2024

कवि होय के शक मा मिला है।। DAHIJAR

 या  जउन  हमी  तकमा मिला है। 
कवि   होय  के  शक मा  मिला है।।
 
होरी   के   फगुहार   बताउथें  कि 
या   बम   चका  चक मा  मिला है। । 

 कोउ  ता  अजल्याम  बताउत थै 
कोउ   कहा  थै  हक  मा मिला है। । 

उइ  रोज  सकारे मंदिर मा मिला थें 
जब से मालदार मोहकमा मिला है।। 

अब प्याज बोये मा  अफीम जमा थी 
बीज राजनीत  के चकमा मा मिला है। ।
 
 वा हंस गा तै रोजी रोटी के तलाश मा 
जेखर आधार काड काल्ह ट्रक मा  मिला है 
✍️हेमराज हंस

बुधवार, 13 मार्च 2024

DAHIJAR

 बन्दे  भारत  रेल  मा  जनरल  डब्बा हेरत्या हा। 

महाकुंभ  मा  जाके   आपन  बब्बा हेरत्या हा।। 

काल्ह   बताये  रह्या  गोत्र  तुम मंदिर मा  जाके 

आज मस्जिद मा आके आपन अब्बा हेरत्या हा।।  

हेमराज हंस

बसंत के दोहे

 अपना हयन गुलाब अस, हम कनेर के फूल। 

कोउ दिहिस मछेह के,  छतना  काही  गूल। । 


 अस कागद के फूल मा, गमकैं लाग बसंत।

जस पियरी पहिरे छलय, पंचबटी का संत।।


हबा  बसंती  चूम गै,  जब  गुलाब  के ओंठ। 

ता भमरा का झार भै, जिव का रहा कचोट।।


जब फागुन दसकत किहिस,गड़ी गाँव  मा डाँड़।

चिनी केर रंग बदलिगा ,   लागै  जइसा    खांड।। 


जिधना से फागुन लगा, बागै मन बउरात ।

दिन गउरइंया अस लगै, औ जिंदबा कस रात।।


भमरा तक सूंघय लगा अब चम्पा का फूल।

अइसा मउसम मा भला कासे होय न भूल।।


पुष्पवाटिकै मा मिली, सहज प्रीत का नेम।

सुरपंखा हेरत फिरय, पंचबटी मा प्रेम।।


फगुनहटी बइहर चली ,गंध थथोलत फूल।

भमरा पुन पुन खुइ करै, तितली पीठे गूल।।


सनकिन सनकी बात भै, आगू पाछू देख।

कब आंसू मा भींज गै लखिस न काजर रेख ।।


 बड़ी   ललत्ती   लग  रही,  अमराई   कै  भूंख। 

असमव ओखे डाल मा, नहीं कोयलिया कूंक।।

महुआ अस महकैं लगा, जब मन मा मधुमास।
ता आँखिन के नेत का, भा खंडित संन्यास।।

बीस जघा करजा किहिन, ता होइ सका प्रबंध।

अपना का आबा नहीं, नेउता मा आनंद।।

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।