रविवार, 17 मार्च 2024

दिहा काहे खुरखुन्द।

कागा से कोयल कहिस,  दिहा काहे खुरखुन्द। 
तोहरव  प्रिय बोली लगी,  बन जा काग भुसुंड।।
 
जब  मतलब  पूछय  लगें, रामराज्ज का मित्र। 
हम निकार के धइ दिहन,अबधपुरी का चित्र।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

KAVI SAMMELAN IM MAIHAR 13.09.2026

LALLA MAHRAJ