गुरुवार, 18 जनवरी 2024

नबा साल मा सब जने, रहैं निरोग प्रसंन्न।

नबा साल मा सब जने, रहैं निरोग प्रसंन्न।

सब काही रोजी मिलय, खेतन मा हो अन्न।।


राम देस कै आतिमा, राम देस के प्रान ।

हमरे भारत देस कै, राम से ही पहिचान ।।


अबधपुरी मा पूर भा, मंदिर का निरमान।

सदिअन के बलिदान का, अबै मिला है मान।।


केत्तेव पुरखा गुजरिगें लये हिदय मा हूक।

आजु तृप्त भै आतिमा लउलितिया कै भूख।।


जय जय पाबन अबध कै जय जय भारत बर्ष।

मंदिर के निरमान का जन जन मा है हर्ष।।


आदि पुरुस जहाँ मनू भें, करिन सृष्टि निरमान।

अजोध्या पाबन धाम है , मनुज का मूल अस्थान।।


किहिस सनातन सब दिना, जन मंगल का गान।

प्राणी मा सद भावना, बिस्व केर कल्यान।।

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