बीस जघा कर्जा किहिस, तब होइ सका प्रबंध।
अपना का आबा नहीं, भोजन मा आनंद।।
बीस जघा करजा किहिस तब भा कन्यादान।
अपना काही लग रहें ,सब फीके पकवान। ।
बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : बाबू जी। : बाबू जी =============================== बड़ी मुसीबत झेल के ह...
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