बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
सोमवार, 1 जून 2026
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : बाबू जी।
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
मंगलवार, 27 जनवरी 2026
चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।
चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।
मीठ खूब खाइन ता फंस गें मधुमेह मा।।
राजा मांडा घाई हाल होइहैं हजूर के
कमंडल फेकय लागें मण्डल के नेह मा।।
हेमराज हंस
हंस कै जरुरत नहीं
शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025
का बताई की कहां कहां पिरात है
रविवार, 12 अक्टूबर 2025
शंकरलाल तिवारी जी
पंचतत्व में खो गये , श्री युत शंकर लाल।
जनहित के संघर्ष को, रखेगा विन्ध्य सभाल।।
कौन ! सुनेगा ! अब यहाँ, दीन हीन की पीर !
विन्ध्य विदाई दे रहा , भर नैनों में नीर!!
लोकतंत्र जन कंठ की , बन कर रहे अवाज।
जनता के दिल में किया लोक रत्न ने राज।।
शोक ! छा गया विन्ध्य में, थमी समय की चाल!
सादर है श्रद्धांजली , हे! जन नायक लाल !!
शनिवार, 11 अक्टूबर 2025
हे सारद माई करउँ चेरउरी।
हे सारद माई करउँ चेरउरी।
तोही चढ़ाइहौ नरिअर रेउरी।
नहीं जानव मैं छन्द ब्याकरन ।
कबि अस मोरे नहीं आचरन। ।
अइगुन करत बीत मोरी अउरी।
हमूं का आसिरबाद दे मइय्या।
बुद्धि बिबेक से लाद दे मइय्या।।
हे हँसबाहिनी ग्यान कै गउरी ।
सब काही तैं दिहे बुद्धि बर।
मोर तोरे चरनन मा है घर। ।
तउअव मोर मती ही बउरी।
कर दे ग्यान अच्छर कै बरखा।
धोबर जाय पाखण्ड औ इरखा।।
हंस के हिदय बना ले चउरी।
हेमराज हंस
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हंस कै जरुरत नहीं उनही ता सुआ चाही। रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक खुआ चाही।। बेमारी से हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर बे असर दबा ह...
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सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है। औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।। कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ पाथर मा रसरी का घट्ट...
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बघेली कबिता ========= का बताई की कहां कहां पिरात है। बैचैन हबै जिउ मन बूढ़त उतरात है।। उनखर फरक रही ही सकारे से बा...

