बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
शुक्रवार, 22 मार्च 2024
हमरे खलीसा मा पइसा नहीं रहा। येसे आदर अपना जइसा नहीं रहा।।
गुरुवार, 21 मार्च 2024
मइहर है जहां बिद्या कै देवी
रविवार, 17 मार्च 2024
भीड़ टंटपालिन कै पोस्टर तमीच का ।
दिहा काहे खुरखुन्द।
गुरुवार, 14 मार्च 2024
कवि होय के शक मा मिला है।। DAHIJAR
बुधवार, 13 मार्च 2024
DAHIJAR
बन्दे भारत रेल मा जनरल डब्बा हेरत्या हा।
महाकुंभ मा जाके आपन बब्बा हेरत्या हा।।
काल्ह बताये रह्या गोत्र तुम मंदिर मा जाके
आज मस्जिद मा आके आपन अब्बा हेरत्या हा।।
हेमराज हंस
बसंत के दोहे
अपना हयन गुलाब अस, हम कनेर के फूल।
कोउ दिहिस मछेह के, छतना काही गूल। ।
अस कागद के फूल मा, गमकैं लाग बसंत।
जस पियरी पहिरे छलय, पंचबटी का संत।।
हबा बसंती चूम गै, जब गुलाब के ओंठ।
ता भमरा का झार भै, जिव का रहा कचोट।।
जब फागुन दसकत किहिस,गड़ी गाँव मा डाँड़।
चिनी केर रंग बदलिगा , लागै जइसा खांड।।
जिधना से फागुन लगा, बागै मन बउरात ।
दिन गउरइंया अस लगै, औ जिंदबा कस रात।।
भमरा तक सूंघय लगा अब चम्पा का फूल।
अइसा मउसम मा भला कासे होय न भूल।।
पुष्पवाटिकै मा मिली, सहज प्रीत का नेम।
सुरपंखा हेरत फिरय, पंचबटी मा प्रेम।।
फगुनहटी बइहर चली ,गंध थथोलत फूल।
भमरा पुन पुन खुइ करै, तितली पीठे गूल।।
सनकिन सनकी बात भै, आगू पाछू देख।
कब आंसू मा भींज गै लखिस न काजर रेख ।।
बड़ी ललत्ती लग रही, अमराई कै भूंख।
असमव ओखे डाल मा, नहीं कोयलिया कूंक।।
महुआ अस महकैं लगा, जब मन मा मधुमास।
ता आँखिन के नेत का, भा खंडित संन्यास।।
बीस जघा करजा किहिन, ता होइ सका प्रबंध।
अपना का आबा नहीं, नेउता मा आनंद।।
भूंखा टोरबा सोयगा,
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।
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बघेली कविता आबा उनखे बेलहरा का चूना देखाई थे। जुजबी नहीं दोउ जूना देखाई थे। । चपरासी के भरती मा इंजीनियर ठाढ़ हें देस मा ...
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नारी के सम्मान से,सम्बत कै सुरुआत। दुनिआ का संदेस है, भारत का नवरात। ।
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केत्तव पुरखा गुजरिगें, मन मा लये रहस्स। बरिस पांच सै मा मिला ,देखैं का शुभ द्रस्स।। अपने भुंइ मा राम जू , मना रहे हें पर्ब । ...
