बीस जघा कर्जा किहिस, तब होइ सका प्रबंध।
अपना का आबा नहीं, भोजन मा आनंद।।
बीस जघा करजा किहिस तब भा कन्यादान।
अपना काही लग रहें ,सब फीके पकवान। ।
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हम दयन नये साल कै बधाई।
फलनिया कहिस तोहइ लाज नहीं आई।।
पाँव हें जोंधइया मा हाथे परमानु बम
पै देस मा घ्रिना कै खासा जबर खाई। ।
हेमराज हंस भेड़ा मइहर
भूंखा टोरबा सोयगा, रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।