बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
गुरुवार, 30 जुलाई 2026
सोमवार, 1 जून 2026
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : बाबू जी।
बघेली साहित्य bagheli sahitya हेमराज हंस : बाबू जी।: बाबू जी =============================== बड़ी मुसीबत झेल के हमही, पालिन पोसिन बाबू जी। लदी गरीबी से गाड़ी का, बल भर ढ़ो...
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
मंगलवार, 27 जनवरी 2026
चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।
चक्र कै आत्मा घुस गै कमल के देह मा।
मीठ खूब खाइन ता फंस गें मधुमेह मा।।
राजा मांडा घाई हाल होइहैं हजूर के
कमंडल फेकय लागें मण्डल के नेह मा।।
हेमराज हंस
हंस कै जरुरत नहीं
हंस कै जरुरत नहीं उनही ता सुआ चाही।
रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक खुआ चाही।।
बेमारी से हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर
बे असर दबा हैं ता रोगी का दुआ चाही। ।
हांथी अस तरक्की देखि के भोकैं लगें कूकुर कस
अइसै सब के जीमन मा झरहा जरतुआ चाही।।
भला बताबा गूलर का ज्वार भाटा से का मतलब
ओही ता गुजर के निता बस एकठे कुआं चाही।।
घुप्प अँधिआर होइ गा कइसा भरी दुपहरी मा
कस्यप से कहिद्या हंस सुरिज का उआ चाही। ।
हेमराज हंस
शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025
का बताई की कहां कहां पिरात है
बघेली कबिता
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का बताई की कहां कहां पिरात है।
बैचैन हबै जिउ मन बूढ़त उतरात है।।
उनखर फरक रही ही सकारे से बायीं आँख
पलकैं लगउतीं लूसी ता काजर सुगात है।।
वाठर बनाउत तक ता उनसे नहीं बनै
लबरी बता रहे हें अमल्लक जनात है ।।
उनखे चिकोटी चींथे कै चिन्हारी बनी ही
आँखी मा उनखे प्रेम केर जल प्रप्रात है।।
पाबन पुनीत प्रीत कै पूजा यतर ही हंस
तुलसी के चउरा का दिआ जस टिमटिमात है।।
हेमराज हंस
रविवार, 12 अक्टूबर 2025
शंकरलाल तिवारी जी
पंचतत्व में खो गये , श्री युत शंकर लाल।
जनहित के संघर्ष को, रखेगा विन्ध्य सभाल।।
कौन ! सुनेगा ! अब यहाँ, दीन हीन की पीर !
विन्ध्य विदाई दे रहा , भर नैनों में नीर!!
लोकतंत्र जन कंठ की , बन कर रहे अवाज।
जनता के दिल में किया लोक रत्न ने राज।।
शोक ! छा गया विन्ध्य में, थमी समय की चाल!
सादर है श्रद्धांजली , हे! जन नायक लाल !!
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सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है। औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।। कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ पाथर मा रसरी का घट्ट...
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बघेली कबिता ========= का बताई की कहां कहां पिरात है। बैचैन हबै जिउ मन बूढ़त उतरात है।। उनखर फरक रही ही सकारे से बा...


