मंगलवार, 13 सितंबर 2022

शहर मा जाके रहय लाग जब से आपन गाँव। भरी दुपहरी आँधर होइगै लागड़ होइ गै छाँव। । गाँवन कै इतिहास बन गईं अब पनघट कै गगरी। थरी कोनइता मूसर ज्यतबा औ कांडी कै बगरी। । गड़ा बरोठे किलबा सोचइ पारी आबै माव । हसिया सोचै अब कब काटब हम चारा का ज्यांटा। सोधई दोहनिया मा नहि बाजै अब ता दूध का स्यांटा। । काकू डेरी माही पूंछै दूध दही का भाव। दुर्घट भै बन बेर बिही औ जामुन पना अमावट। ''राजनीत औ अपराधी ''अस सगली हाट मिलावट। । हत्तियार के बेईमानी मा डगमग जीवन नाँव। जब से पक्छिमहाई बइहर गाँव मा दीन्हिस खउहर। उन्हा से ता बाप पूत तक करै फलाने जउहर। । नात परोसी हितुअन तक मां एकव नही लगाव। कहै जेठानी देउरानी के देख देख के ठाठ । हम न करब गोबसहर गाँव मा तोहरे बइठै काठ। । हमू चलब अब रहब शहर मा करइ कुलाचन घाव। नाती केर मोहगरी ''आजा'' जुगये आस कै बाती। बीत रहीं गरमी कै छुट्टी आयें न लड़िका नाती। । खेर खूंट औ कुल देउतन का अब तक परा बधाव। ममता के ओरिया से टपकें अम्माँ केर तरइना। फून किहिन न फिर के झाँकिन दादू बहू के धइन.। । यहै रंझ के बाढ़ मां हो थै लउलितियन का कटाव। शहर मा जाके ---------------------------------------- हेमराज हंस --9575287490
सब्द बह्म का रूप है सब्द धरै जब भेष। मैहर मा एक संत हें पंडित रामनरेश।।

पूज विवेकानंद मा है भारत का गर्व।

पूज विवेकानंद मा है भारत का गर्व।
 उनखे बसकट मा रमा जुवा दिवस का पर्व।। 

रचिन विवेकानंद जी एक नबा इतिहास।
 भारत केर महानता का बगरा परकास।। 

जुरे शिकागो मा रहें दुनिया के बिद्वान। 
एक सुर मा ब्वालैं लगें जय जय हिन्दुस्तान।। 

चाह शंकराचार हों चाह विवेका नंद। 
भारत के जसगान का रचिन ऋचा औ छंद।।
कहूं कहूं बूड़ा चढा भरे खेत औ ताल। हमरे बिंध मा चल रही बदरी कै हरताल।।

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।