बघेली दोहा ग़ज़ल कविता छंद का संग्रह bagheli doha bagheli kavita bagheli sahitya Bagheli folk literature
बुधवार, 1 जून 2022
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हंस कै जरुरत नहीं उनही ता सुआ चाही। रौंपें खै खोड़इसा ता उनही एक खुआ चाही।। बेमारी से हीच चुकैं हें सगले बैद औ डाकदर बे असर दबा ह...
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सगलेहार उनहिन का पट्टा बना है। औ हमरे खातिर सिंगट्टा बना है।। कुआं के पाट मा जाके देख्या तू कबहूँ पाथर मा रसरी का घट्ट...
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बघेली कबिता ========= का बताई की कहां कहां पिरात है। बैचैन हबै जिउ मन बूढ़त उतरात है।। उनखर फरक रही ही सकारे से बा...
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