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सोमवार, 2 नवंबर 2015
कुच्छ न पूछा हाल तिवारी : हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
कुच्छ न पूछा हाल तिवारी : हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।: बिना धनी धोरी का है हेन निरधन अउर गरीब। चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। । झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा। गरीबन का है न...
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
बिना धनी धोरी का है हेन निरधन अउर गरीब।
चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। ।
झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा।
गरीबन का है नाव नही पवित्र गरीबी रेखा मा। ।
चाहे जउन गरीब होय पै सबकै समिस्या एक ही।
सबके आँसू अंतस पीरा केर तपिस्या एक ही। ।
राजनीत सब दिन चटिस ही पूंजी पति के तरबा।
औ गरीब के घर का लाइस अपनेन घर का कोरबा। ।
राजनीत का लखा कपट छल की ही केत्ती सूध।
हमरे घर मा दारू बांटै अपने घर मा दूध। ।
पी पी दूध भै राजनीत य देखा केतनी मोट।
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
हेमराज हंस ----
चाहे ज्याखर राज होय पै बदला नही नसीब। ।
झउआ भर चल रही योजना पै ओखे कउन लेखा मा।
गरीबन का है नाव नही पवित्र गरीबी रेखा मा। ।
चाहे जउन गरीब होय पै सबकै समिस्या एक ही।
सबके आँसू अंतस पीरा केर तपिस्या एक ही। ।
राजनीत सब दिन चटिस ही पूंजी पति के तरबा।
औ गरीब के घर का लाइस अपनेन घर का कोरबा। ।
राजनीत का लखा कपट छल की ही केत्ती सूध।
हमरे घर मा दारू बांटै अपने घर मा दूध। ।
पी पी दूध भै राजनीत य देखा केतनी मोट।
हंस कहैं जे दारू बांटय ओही न दीन्ह्या बोट। ।
हेमराज हंस ----
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015
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