सोमवार, 21 नवंबर 2022

BAGHELI MUKTAK == ALL TO ALL

    बघेली मुक्तक
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भारत के नेरे रिगु साम यजु अथर्व है।
अपने परिपाटी का हमीं बड़ा गर्व है। ।
कोट कोट बधाई देस बासिन का हंस
नये साल सम्बत् का आजु शुभ पर्व है। ।
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हमरे भारत माता कै पूजा बधाई हो थी।
एहिन से गाँव गाँव मा खेर दाई हो थी। ।
जब कोऊ हमरे स्वाभिमान का ललकारा थै
वाखर   दशा  अफजल  की नाइ हो थी। ।
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घर घर मा फहरान तिरंगा, अमरित परब अजादी के।
होइगें छिहत्तर  बरिस देस के, सबका गरब अजादी के।।
बंदेमातरम राष्ट मंत्र से गूंज उचा धरती अकास
देशभक्ति के जनगनमन से अस्तुति करब अजादी के।।
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 गाँधी  जी  अमर  हें गंगा  के धारा अस।
देस के माटी  मा जन जन के नारा अस। ।  
गाँधी जी पढ़ाये जइहै सब दिन इस्कूल मा
भारत के बचपन का गिनती औ पहारा अस। ।
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भारत माता भय दुखियारी खो के अटलबिहारी का।
जुग गाई उनखर गुन गाँथा थाती धरे चिन्हारी का। ।
जब जब नेतन कै बात चली ता भारत माता यहै कही
देखा अपने अंतस का पून देखा अटलबिहारी का। ।
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जे बदल दइस भुंगोल, नमन वा इंदिरा गाँधी  का।
इतिहास के पल  अनमोल ,नमन वा इंदिरा गाँधी का।।  
बान्नाबे हजार पकिस्तानिन से , कनबुड्ढ़ी  लगबाइन
जे कबौ न खाइन  झोल , नमन वा इंदिरा गाँधी का। ।
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उई बड़े  अहिंसावादी हें पै रहा थें नींद मा।
गाँघी जी  का बोकरा बेंच डारिन बकरीद मा।।
 हम    उनखे   हिआव   का   प्रनाम  करी थे   
अश्व  शक्ति  ह्यारा थें घोड़बा के लीद मा। ।
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 राजनीति जेहि रही घंघोई। रामा हो रामा
ओही थीर कइ  दिहिन गंगोई।। रामा हो रामा
 सांपौ मरिगा टूट न लाठी।
पै कुछ जन कूदैं जस आंटी।।
छूटि गै सांड़न कै चलौना। रामा हो रामा
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पुलिस जाना थी जेबकतरा आय।
हमरे समाज का खतरा आय।।
तऊ   सलामी   ठोंक  रही  की
राजनीत   का   रकरा   आय।।
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 तुम हमार आँसू देखा हम तोर बिदुरखी देखी थे।
हाथे मा रिमोट लये हम आपन कुरकी देखी थे। ।
कोउ नहि आय दूध का धोबा राजनीत के धंधा मा
साँझ सकारे चाय पिअत हम खबर कै सुरखी देखी थे। ।
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 नंगई      से      नहीं          बड़प्पन     से         नापा।
फेर   तुहूं   अपने    सीना    का   छप्पन  से     नापा।।
य  देस    देखे  बइठ   है राजा  नहुष  के  अच्छे   दिन  पै ,
वाखर मतलब या नहीं तुम बाल्मीक का बिरप्पन से नापा। ।  
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अब  अउर  येसे  केतू निकहा सीन चाही।
 चाल चलन  नापै का उनही  मशीन चाही।।
चश्मा  के  मथरे  अब   काम   न    चली   
उनखर चरित्त द्याखैं  का अब दूरबीन चाही। ।
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हम   दयन    नये   साल  कै   बधाई।  
फलाने कहिन तोहइ लाज नहीं आई। ।
कुटिया के खुटिया का कलेण्डर बदला है
पै अबहूँ   धरी   ही    टुटही   चारपाई। ।   
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कोऊ अमीरी से ता कोउ गरीबी से दुःखी है।
कोउ दुसमन से ता कोउ करीबी से दुःखी है। ।
या   दुनिया   मा   सुख   संच  हे रे नहीं  मिलै  
कोउ मियाँ  से ता  कोउ  बीबी  से  दुःखी  है। ।     
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वा भले जीभ दार है पै मकुना मउना है।
एहिन से ओखे हीसा मा अउना पउना  है। ।
पड़बा है काहे दूबर य बात दिल्ली जाना थी
दुधारू लोकतंत्र के पडउना  का थम्हाउना है। ।
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उइ बात बड़ी ठोस औ प्रमानिक बताऊ  थें।
सामाजिक   जहर   का   टानिक   बताऊ थें।।
जब  जब   राजनीत   का   हांका   परा   थै   
ता फलाने   नास्तिक का  पुरानिक बताऊ थें। ।
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काहू का पिसान से ता काहू का चोकर से चला थै।
काहू का एक्का से ता काहू  का जोकर से चला थै।।   
वा  महतारी  के  हाथ  कै  रोटी  भला  का जानै
ज्याखर    रसोई    घर  नोकर    से    चला    थै। ।   
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उनखे कइ शरद्‌‌ अस  पूनू हमरे कइ्र्र अमउसा है।
रदगदग द्‌यांह फलाने कै,हमरे तन मां खउसा है॥
उंइ गमला कै हरिअरी देख,खेती कै गणित लगउथे,
काकू   कहाथे   चुप    रहु   दादू   भउसा    है॥
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कुछ जन  राबन  का  फूफा बताउथें।
चलनी अस चरित्त का सूपा बताउथें।।
पाखंड  के बेशर्मी कै  उदारता तो देखा  
कुलच्छनी सूर्पनखा का सतरूपा बताउथें। ।
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उइ   भैसासुर  का  आपन   बाप   बताउथें।
दुर्गा मइया कै  पूजा का परल्याप बताउथें। ।
कइसा  मारी के  ही मती हे शारद मैय्या ज्ञान द्या
अकिल के  ओछाहिल बुद्धी कै नाप बताउथें।।
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अपना का बिजय दसमी कै सादर बधाई।
जउन भीतर बइठ है वा राबन का जलाई।।
राखी नजर पुजारी अस शिकारी कस  नहीं
येतुन मा देस समाज कै होइ जई भलाई। ।
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 अपना के तेल मा खरी अस जनाथी।
या सम्बेदना मसखरी अस जनाथी।।
जे डबल रोटी   का  कलेबा करा थें
उनही अगाकर जरी अस जना थी। ।
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उंई चाहाथें देस मा बाउर पइदा होंय।
 औ उनखे घर मा जनाउर पइदा होंय।।
 एक बूंद पानी न बरखै खेत मा
 औ सीधे धान नही चाउर पइदा होंय।।
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उनखर भाखा सखार अस जना थी।
कऊनव करतूती तोखर अस जाना थी। ।
जब से हबा मा माहुर घोरिस ही राजनीती।
तब से भाई चारा का बोखार अस जाना थी। ।
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कुर्सी के सबाल उइ दरी से पूंछा थें।
गरु गंभीर बात मसखरी से पूंछा थें। ।
तेल कोल्हू पी गा कि पहार मा चुपरा गा
उइ पशु आहार के खरी से पूंछा थें। ।  
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कोउ मूसर कोउ कांड़ी लइगा।
कोउ टठिआ कोउ हांड़ी लइगा ।।
आसौ देबारी का जब सफाई भै
रसखान औ कबीर का कबाड़ी लइगा।
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फलाने हाथ मा सीसा लये बइठहें।
बांचै का हनुमान चलीसा लये  बइठहें।।
काल्ह कहिन राम पंचतंत्र अस केहानी आंय
आज फसल काटै का बीसा लये बइठहें।।
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अब एक रुपिया कै भांज नही मिलै।
गिरे के बाद भुंइ मा गाज नही मिलै।।
उंइ अब चुल्लू भर पानी लये ठाढ हें
पै बूड़ै का अटकर अंदाज नही मिलै।।
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बपुरी आज बसिन्दी होइगै।
फाट के चिन्दी चिन्दी होइगै।।
बिना काज  कै महतारी अस
भासारानी  हिन्दी होइगै।।
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उनहूँ  का  पहिराबा   माला।
काहे लागिगा जीभ मा ताला। ।
उइ ता  इंद्रा  के बंसज आही
चाहे  करैं जहां  मुँह  काला। ।
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 उइ बड़े सभ्भदार हें पै गुच्चा अस लगाथें।
राम दै ! केमाच  के  गुच्छा  अस लगाथें।।
तुलसी उखाड़ के जब बेसरम लगाइअन ता
फलाने कहा थें हमीं लुच्चा अस लागा थें। ।    
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उइ कइथा फ्वारैं का अमकटना ह्यारा  थें।
आपन चरित्त चमकामै का घटना ह्यारा थें।।
टिकस देथें हेर हेर के खुद अपराधिन का
आपन दाग मूंदय के निता उपटना ह्यारा थें। ।
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गुंडा का न मारा काल्ह नेता बन जई।
पाथर जब  खिअइ ता रेता  बन  जई। ।
कानून  बनाई वा सदन मा बइठ के    
हमरे समाज का बिधि बेत्ता बन जई। ।
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उनखे नजर मा दुइ देस भक्त असली ।
एक ता अतंकबादी दूसर नक्कसली। ।
दूनव के मरे उंइ कपार धरे रोबा थें
जइसा उजरिगा होय खेत दुइ फसली।।
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कुरथा जेखे नाप का है।
देस ओखे बाप का है।।
अपना के हांथे मा बोट
बांकी लाठी छाप का है।।
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बेसाही सरकार का रुतबा नही रहै।
जइसा कठपुतरी मा सुतबा नही रहै।।
भले पूजा जिंद बरम बीस ठे खबीस
पै हनुमान चलीसा बांचा त भुतबा नहीं रहै।।
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फलाने कहाथें कि रबइया ठीक नहीं।
कुरसी का दोख है कि  बइठइया ठीक नहीं।।
अमाबस के रात मा उंइ हेरात हें चांदनी
औ ऊपर से कहा थें कि जोंधइया ठीक नहीं।।
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हमरे बघेली का खतरा नहि आय।
वमै कउनौ मेर का अतरा नहि आय।।
बरेदी के गउंखर से मालिक के बखरी तक
कउनौ बिचइकी का पतरा नहि आय।।
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आम जनता जूझाथी रोटी के निता।
औ उंई लड़ि रहे हें डबल रोटी के निता।।
दिन मा तीन बेर उंई ओन्हा बदला थें
बपुरी जनता तरसा थी लगोटी के निता।।
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हथौड़ा चला गा  संसी चली गै।
मछरी के लोभ मा बंशी चली गै। ।
चौकीदार जागत रहें रात भर
तउ माल्या के साथ करन्सी चली गै। ।
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चुङइलिन के भाव अबै नीक के ठंडान नही
अभुआय लगे हें परेत पुन देबार मा।
शहरन मा गॉवन मा घर घर दुआर मा। ।
कहिन सेंतै भागीरथ तपिस्या करिन तै
हम गंगा लै आनित बइठ के नेबार मा। ।
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उइं बड्डे 'धरमराज 'हें जुऑ खेला थें।
परयाबा के खोधइला म सुआ खेला थें। ।
दुआर से कहि द्या कि सचेत रहैं
आज काल्ह केमरा से घुआ खेला थें। ।
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 हम कविता लिखय का व्याकरण नही बांची।
काहू का लिहाज   औ  आकरन नही बाँची। ।
हम देखी थे समाज के आँसू औ पीरा
छंद लिखय का गण चरण नही बाँची। ।
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हाँ हजूर हम दुइ कउड़ी के पै अपना कस नीच नही।
छर छंदी के जीवन बाले माया मृग मारीच नही। ।
भले मशक्कत कै जिदगानी छान्ही तरी गुजारी थे
हमीं गर्व है कि बेईमानी हमरे तनिक नगीच नही। ।
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 समाज मा  दहेज़ कै भारी दुकान होथी।
नींद नही आबै जब बिटिया सयान होथी। ।
उई कहिन तै देस से कि भागवत सुनबाउब
हेन किसानन के घर मा गरुड़ पुरान होथी। ।
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उई अउठा मा पहिर के  पैती देखाउथें।
पसीना के पूत का  गैती देखाउथे। ।
ज्याखर  धधे हें मंत्री जी जेल मा
ओऊ सदाचार कै तैती देखाउथे। ।
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दइया नाहर बिजली का बिल मोरे बप्पा रे।
जइसा घर मा खुली होय मिल मोरे बप्पा रे।।
नीक रहें उंई गनी गरीबन काही ता झउखिन
ईं निरदइयन का पाथर दिल मोरे बप्पा रे।।
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देस मा भूंख कै बस्ती ही दादू ।
 तऊ रोटी भात मा जियसटी ही दादू ।।
महगाई बजिंदा खाये ले थी
अमरित पर्ब कै मस्ती ही दादू।।
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पहिले लोकतंत्र का गुंडन से बचाबा।
ओखा माहुर भरे कुण्डन से बचाबा। ।
कुतका औ  चुम्मा का खेल जनता देखा थी
देस का पाखंडी पंडन से बचाबा। ।
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आबा गुंडागर्दी का नमूना देखाई थे।
जुजबी नहीं दोऊ जूना देखाई थे। ।
जउन सत्तर साल से उइ देस का लगाबा गा
वा उनखे  बेलहरा का चूना  देखाई थे। ।
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समय कै घूमत चकरी देखा।
खूंटा देखा सकरी देखा। ।
आज जो भस्मासुर तुम पलिहा
काल्ह अपना अखरी देखा।
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आज वा कालर नहीं पकड़िस गरिआय के चला गा हमी।
फलाने कहा थें गुंडई मा आ रही कुछ कमी।
जो समाज के सनीचर से अपना का बचय खय.
ता खीसा  मा डारे रही गम्मदारी कै शमी। ।
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जे पुरखन के पींठ का घाव नहीं देखिस।
वा लगथै पबाईदारन का गाँव नहीं देखिस।।
चुनु का संच पाइस ता अक्कास मा उड़ा थै
वा धरती से आपन उखड़त पांव नही देखिस।।
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लछिमी का बोलायन ता जलंधर आय गा।
सुरपंखा कै नाक लये दसकंधर आय  गा।।
जबसे हनीटेप माही नारद जी नपे
ता मोहनी के मोह माही बंदर आय गा।।
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कोउ कहा थै पाप अस मरा है।
कोउ कहा थै सांप अस मरा है।।
जिधना से तीन सै सत्तर हटी ही
उधिना से लगथै  बाप अस मरा है।।
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भले बगडूरा से घर म धूर आय गै।
पै आँधी से लड़य कै सहूर आय गै।।
लागा थै ओही कुसाइयित  गेरे ही
या दारी  अलही भर पूर आय गै।।
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पियासा परा हम, हेन नल क देख्‍यान।
उूसर मां बाइत करत,हल क देख्‍यान ॥
आगी लगाय के अब,कहथें फलाने,,
धर बरिगा ता बरिगा,हम दमकल देख्‍यान॥
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नल तरंग बजाउथें,बजबइया झांझ के।
देश भक्‍ति चढाथी,फलाने का सांझ॥
उनहीं ईमानदार कै,उपाधि दीन गै,
जे आंधर बरदा बेंच दइन काजर आंज के॥
........ 59  ..............
शांती क पाठ लड.इया से पूंछत्‍या है ।
शनीचर क पता अढ़इया से पूंछत्‍या है॥
भोपाल से चला औ,चउपाल मां हेरायगा,
विकास क पता मडइया से पुंछत्‍या है॥
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करियारी अस पगहा नही भा ।
फउज मां भरती रोगहा नही भा॥
उनसे जाके कहिद्‌या भूंभर न करैं,
समय काहू का सगहा नही भा॥
........ 61  .............
भइस अबै बिआन नही,उंइ सोठ खरीदाथें।
लिपिस्‍टिक लगामै क,ओठ खरीदाथें॥
दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र मां,
उंइ एकठे बोतल से, वोट खरीदाथें॥
.......  62 ...........
आपन सहज बघेली आय।
गांव के क्‍वारा कै खेली आय॥
विंध्‍य हबै जेखर अहिबात,
ऋषि अगस्‍त कै चेली आय॥
..........63 ...........
फलाने कै भंइसी निकहा पल्‍हाथी।
लगथै आँगनवाड़ी कै दरिया वा खाथी॥
गभुआर बहुरिगें धांधर खलाये,
सरकारी योजना ठाढे बिदुराथी॥
......... 64 .........
पढ़इया स्‍कूल छूरा लइके अउथें।
हम उनसे पूंच्‍छ्‌यन त कारन बताउथें॥
पढ़ाई के साथ साथ सुरक्षव त जरुरी ही,
आज काल्ह  सर जी पी के पढ़ाउथें। ॥
.......  65  ....  ......
हम जेही मांन्‍यान कि बहुतै बिजार है।
लागथै भाई वा बरदा गरियार है ॥
जब उनसे पूंछ्‌यन त कहाथे फलाने,
दहकी त दहकी नहि दल का सिगार है॥
......... 66 ............
फूल हमही त जरबा जनाथै।
बिन जंगला केर अरबा जनाथै॥
बहुराष्‍ट्‌ीय कंम्‍पनी क पानी भरा है,
औ देशी मांटी क तलबा जनाथै॥
......... 67  ........
घिनहौ क नागा नही कही,येही बड़प्‍पन मान कहा ।
फलाने  कहाथें  तुम  हमी, अकबर महान कहा ॥
जेही    बंदेमतरं   गामैं   मां   लाज   लागाथी,
उंइ कहा थें हमूं का ,  भारत कै संतान कहा ॥
..........67 ...........
हम दयन नये साल कै बधाई।
फलाने कहिन तोहई लाज नही आई॥
पांव हें जोधइया मां हांथ मां परमानु बम
पै पेट मां बाजाथी भूंख कै शहनाई॥
.......... 68 ............
तुहूं अपने हांथ कै चिन्‍हारी देख ल्‍या।
भाई चारा काटैं बाली आरी देख ल्‍या॥
नीक काम करिहा ता वा खूंन मां रही,
गिलहरी के तन केर धारी देख ल्‍या॥
......... 69 .........
हमरेव गांव मां हरिश्‍चंद हें।
दिल्‍ली तक उनखर संबंध हें॥
पुलिसवाले गें लेंय परिक्षा,
आज काल्‍ह उंइ जेल मां बन्‍द हें॥
........ 70 ............
उंइ कहा थें हाल चाल ठीक ठाक है।
जब से भगा परोसी तब से फरांक है॥
अब रोज खुई कराथें पट्‌टीदार से,
औ कहाथें हमरिव कि निकही धाक है॥
.........71 ...............
हम फुर कही थें ता कान उनखर बहाथै।
पता नही तन मां धौं कउन रोग रहाथै॥
तन से हें बुद्ध औै मन से बहेलिया,
पंछी अस  पीरा य लोकतंत्र सहाथै॥
......... 72 ..............
चेतना के देंह का उंइ झुन्‍न न करै।
हांथ जरै जेमा अइसा पुन्‍न न करै॥
इन्‍द्र कै बस्‍यार ही घर के नगीच मां,
गउतम'से जाके कहि द्या उच्‍छिन्‍न न करैं॥
.......... 73 .....  ........
बलफ फियुज होइगा झालर पकड.के।
उंइ हाल चाल पूंछाथें कालर पकड.के॥
सुदामा के चाउर का उंइ का जनैं,
जे बचपन से खेलिन ही डालर पकड. के॥
............ 74 .....  .
उबड़ खाबड़ अस चरित्र का सभ्‍भ नीक बन जांय द्या ।
औ कलिंग के छाती मां करूणा कै लीख बन जांय द्या ।
ओउं   सीता   मइया   का   पलिहैं   अपनें  आश्रम मां,
पहिले हमरे  रत्‍नाकर' का बालमीक बन जांय द्‌या॥
......... 75 ...
काहू का ब्याज कै चिंता ही।
काहू का प्याज कै चिंता ही।।
करजा मा बूड़े  किसान का
र्याज     कै    चिंता       ही। ।
.......... 76  ..........
हमरे ईर्मानदारी का रकवा रोज घटाथै।
सुन के समाचार कर्‌‌याजा फटाथैै॥
जब उनसे पूंछ्‌यन त कहाथें फलाने,
चरित्र का प्र्र्रमान पत्र थाने मां बठाथै॥
........... 77 .......  ...
बड़े ललत्‍ता हया फलाने।
ताश के पत्‍ता हया फलाने॥
हम तोहइ थान मन्‍यान तै,
पै तुम लत्‍ता हया फलाने॥
............ 78 .... ...
मरजादा का उंइ दंड कहा थें।
बंदेमातरं का पखंड कहा थें॥
रोज महतारी जेही ढाढस बधाउथी
उंइ बेरोजगार का बायबंड कहा थें॥
*************79**************
अब सेंतै लागै मांख फलाने ।
हा तुमहिन सबसे बांख फलाने॥
तुहिन लगाये रह्‌या अदहरा
तुहिन उचाबा राख फलाने॥
..........  80 ...........
आज काल्‍ह उंइ जादा दुखी हें।
लागथै उनखर परोसी सुखी हें॥
बड़े शीलवान उपरंगी जनाथें,
पै भितरै भीतर ज्‍वाला मुखी हें॥
.......... 81 .............
खूब सुन्‍यन हम भाषन बांझ।
आपन   दोउ  कान मांज॥
अउर बजायन बल भर तारी,
न उनही शरम न हमहीं लाज॥
**************82*******************
 जन सेवक चाही सुभाव से गभुआर अस।
जे सबका देखै संबिधान के सरकार अस। ।
उई '' सभ्भदारन ''का  जाके  बता द्या
सदन माही रहबा करैं गाँव के भुइयार अस। ।
........... 83 ...............
न पाक के अतंकी चालन से ड्‌यर लगै।
देश का देशी दलालन से ड्‌्रयर लगै॥
जे लुकाये बइठ अपने घर मां मगर मच्‍छ,
उंइ अगम दहार अस तालान से ड्‌यर लगै॥
.......... 84 ..................
काल्‍ह बतामैं गंगा भट्‌ट।
मचा सांझ के लठमलठ्‌ठ॥
हम होन गयन करैं समझउता,
हमरेन लगिगा हरिजन एक्‍ट॥
.......... 85 ................
फसल हुंअय होथी जहां सींच होथै।
कमल हुंअय खिली जहां कीच होथै॥
उनसे कहि द्‌या जमान सम्‍हार के बोलै,
मनई जात से नही बात से नीच होथै॥
.......... 86 ..............
अपना कइती चकाचक्‍क है।
औ हमरे कइती कुतक्‍कहै॥
अब वा कबहूं ठाढ न होइ
जे नजरन से गिरा भक्‍क है॥
........... 87 ..............
व्‍यापार उइ कराथें त वहौ किस्‍त मां।
तकरार उंइ कराथे त वहौ किस्‍त मां॥
जीवन मां अर्थशास्‍त्र का येतू असर परा
प्‍यार उंइ कराथें त वहौ किस्‍त मां॥
........... 88 ..............
हम अपने संकल्‍प से नट नही सकी।
अपने गाँव के मांटी से कट नही सकी॥
हम सुरिज आह्‌यन जोधइया न समझा
डूब ता जाब पै घट नही सकी॥
........... 89 ............
अमल्‍लक जनाथै उनखे चाल से।
हरिश्‍चंद का समझउता है नटवरलाल से॥
लवालब भरा है त आज उइ टर्राथें
सब गूलर भाग जइहै सूख ताल से॥
........... 90 .............
खादी से कहां चूक भै चरखा बताउथें।
केतू भा अजोर य करखा बताउथें॥
जे रोज बोतल का पानी पियाथें
उइ अपने का नदियन का पुरखा बताउथें॥
........... 91 ...............
मजूरन के पसीना से भींज तगाड़ी रे !
गरीबन का खून पिअय आसन कै गाड़ी रे !!
'निराला 'जहां देखिन तै तब से वा होइन ही
लागा थै किरिर देई व्यबस्था मा कांडी रे !!
***************92*******************
उई महतारी कै गारी देथें पइदा भे  हें खीर से ?
या कि मकरध्वज अस महावीर से। ।
मान्यन कि काँटा गूल दइस दुष्ट वा रहा
ता का अपना नफरत करब सगले अहीर। ।
**************92*********************
जे खाय के पतरी मा भोंगा करा थें।
उई ओहिन का खासा तरोगा करा थें।।
कइसा   बिडंबना   ही मोरे  देस कै ,
देस द्रोही कै रक्षा दरोगा करा थें। ।
*************93************
भले अपने देस मा प्रदूषण खूब हें।
समाज मा बिराध औ बिदूषक खूब हें। ।
पै जब तक छत्रसाल अस करेजा बाले हें
तब तक समाज मा भूषन खूब हें। ।
*************94*****************
उई बड़े पइसा बाले हें उनसे नमस्ते करा।
मुँह ओरमाय के नही  हँसते हँसते करा। ।
बड़े  दरगदानी  हें  भले  टेक्स    चोर हैं
उनखे पंडाल कै चर्चा रस्ते रस्ते करा। ।
*************95*******************
उई कहा थें युग-युग जिया।
एक क्वाटर रोज पिया। ।
देखत   रहा  टुकुर-टुकुर
आपन   ओंठ   सिया। ।
************96*****************
हाथे माही थाम्हे माउस।
पूरी दुनिया हमी देखाउस।।
मरि गा बाबा अंधियारे मा
होइ गा नाती पावरहाऊस। ।
***********97****************
कोऊ अद्धी कोउ पउआ लये बागा थें ।
कोऊ तीतुर कोउ कउआ लये बागा थें।।
लोकतंत्र के स्वयंवर मा कुर्सी बरय का
कोऊ साथै पंडित नउआ लये बागा थें। ।
************98********************
रुपिया किलो गोहूँ दुइ रुपिया पिसाई।
खाय मोर ललुआ पोबै मोर दाई। ।
तुमहूं गरीबी का पंचनामा बनबा ल्या
बोलिआय देवर हसै भउजाई। ।
************99****************
चउकस  गिरा मघावट भाई।
 जिव मा सबके तरावट आई।।
गद्गद भै किसान कै छाती
करिस सजावट धरती माई। ।
***********100*********************
चला फलाने दारू बेंची।
नदिया खोदी बारू बेंची।।
हरिश्चाद के देस के आह्यन
लड़िका औ मेहरारू बेंची। ।
************101*********************
पहिले पीठे मा   कोड़न के दाग देख ल्या।
फेर गरीबन से आपन अनुराग देख ल्या।।
डस रहे गरीबन का जे  गाँव गाँव मा
दरबारन के पाले पोसे नाग देख ल्या। ।
*************102*****************
वर्तमान आज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।
दरबारी ताज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।।
पीरा के आँसू अगाधैं उरयाहै का
कवि समाज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।।
*************103********************
 अब भ्रष्टाचार कै चर्चा नही चलै।
फलाने कहा थें ओखे बिन खर्चा नही चलै। ।
भले अजल्याम कै कमाई दबाई मा जा थी
पै ओखे बिन घर का परचा नही चलै। ।
*************104****************
जब जन सेवक विकास खा रहे हें।
ता बकुला शरम के मारे सल्फास खा रहे हें।।
फियुज बलफ से अजोर का उद्घाटन
बिजली घर सगला प्रकाश खा रहे हें। ।
*************105******************
सब सुरिज का सराहा थें निकहा माना थें।
पै ओखर पवाईदार दिया का दुपट्टा ताना  थें। ।
 ओरहन दये मा गिरहन कै धमकी
दरबारी ओजोन परत मा कट्टा ताना थे। ।
*************106*******************
जातिवाद के माथे परंगत नही परै।
कार्बाइट से पके फल मा रंगत नही परै।।
चाह जउन जात केर होय धन्ना सेठ
पै गरीबन के साथ ओखर पंगत नही परै। ।
************107***********************
गूंज रही परभाती भइलो।
रोज बराथी बाती भइलो॥
दिन भर देंय अनूतर गारी
सांझ करै संझवाती भइलो॥
.......... 108 ............
न अकरन न लिहाज फलाने।
कहां गिरी य गाज फलाने॥
कांधा से दुपट्‌टा हेरायगा
प्रगतिशील भै लाज फलाने॥
..........109 ....
खूब सुन्‍यन हम भाषन बांझ।
आपन दोउ कान मांज॥
अउर बजायन बल भर तारी
न उनही शरम न हमही लाज॥
..........110 ........
न पाक के अतंकी चालन से डर लगै।
देस का गद्‌दार दलालन से डर लगै॥
जे लुकाये बइठ अपने पानी मां मगर
अइसा अगम दहार उंइ तालान से डर लगै॥
........... 111 ............
अब सेंतै लागै मांख फलाने।
हा तुमहिन सबसे बांख फलाने॥
तुहिन लगाये रह्‌या अदहरा
तुहिन उचाबा राख फलाने॥
.............112 .............
जउन उइ कहै वहै इतिहास आय।
फलाने कहाथें लगथै बदमाश आय॥
अरे दूध से भरा चह दारू से
संसद भवन त गिलास आय॥
...........113 ..........
अजल्‍याम कै कमाइ दवाई मां जाथी।
पउन ले अइहा सबाई मां जाथी॥
ईमानदारी के रोटी से संस्‍कार आउथें
बेइमानी कै झगड़ा लड़ाई मां जाथी।ं।
...........114 ................
काल्‍ह बतामै महतौ चुन्‍नी।
पसीझ पसीना कै पैसुन्‍नी॥
देंह देखाउत बागै मल्‍लिका
औ बदलाम भै बपुरी मुन्‍नी॥
..........115 ................
जे हांथ कटवाय लेय वोही ताज कहाथें।
जे ढोलकी फोर डारै वोही ओस्‍ताज कहाथे॥
झूरै न होय आपन भारत य  महान्‌ है
हेन पक्‍के जुआरी का धरम राज कहाथे॥
.......... 116 ..............
 मरे  के  बाद  बचै जे वहै सयान आय।
पेट  पलै  जेसे  वहै  जबर  ज्ञान   आय॥
जे कलम गहन धइ देय आपन दरबार मा
वहै निकहा कवि औ बड़ा विद्वान आय॥
.......... 117 ...........
हेन अतरे दुसरे विस्‍फोट ह्‌वाथै।
उइ कहाथें लोकतंत्र मोट ह्‌वाथै॥
नाक मां रूमाल धरे बांटथें मांवजा
उनखे निता मनई बस एक वोट ह्‌वाथै॥
.......... 118 ..............
अनमन अनमन सयान बइठें।
टनमन पीरा के बयान बइठें॥
दोउ जून जूड़े जिव रोटी नही मिलै
आंसू पी पी के अघान बइठें॥
......... 119 .............
आचरन रहाथें जब नेम धेम से।
तब जीवन चलाथै कुशल क्षेम से॥
उंइ रोज चार ठे कुलांचै सुनाउतींहै
को अम्‍मा अस परसाथै टठिया प्रेम से॥
........... 120 .............
अंतस के पीरा का भुतही बताउथे।
पुजहाई टठिया का छुतही बताउथें॥
जे तरबा चाटाथे विदेसी परिपाटी के
उंइ अपने माटी का जुठही बताउथे॥
...........121 .............
केतू भइलो अबै समोखी।
कब तक होइ फुरा जमोखी॥
भारत माता सिसक रही ही
कब तक खुलिहैं आंखी ओखी॥
**************122 ***************
आबा बसन्त स्वागत है पै ठूंठ बचा है।
अपना के अपमान का घूंट बचा है।।
धूधूर धुँआ धुंध से गाँव खाँसा थै
मन के  प्रदूषण का मूठ  बचा  है। ।
***************123************
अपना कै देस भक्ती अलोन अस जना थी।
धृतराष्ट्र के दरबारी द्रोण अस जना थी।।
बंगाल के दुर्घटना मा कंगाल जीभ ही
किरकिट कै हार घाव मा नोन अस जना थी !!
***************124**********************
मजूरन के पसीना से भींज तगाड़ी रे !
गरीबन का खून पिअय आसन कै गाड़ी रे !!
'निराला 'जहां देखिन तै तब से वा होइन ही
लागा थै किरिर देई व्यबस्था मा कांडी रे !!
***************125*************************
गरीब न  होइहैं  ता मालिस  को करी।
अपना कै मक्खन पालिस  को करी। ।
गरीबय  से  अपना   के ठाठ बाठ हें  
ओखे नाव से चार के  चालीस को करी। ।
****************126*******************
दधीच  कै हड्डी औ पोस्टर मामा  मारीच  का।
छहेला  का  सराही  की  सराही   बीज   का। ।
अरे   कूकूर       भले      वफादार          ह्वाथै
पै    ओहू    के    जक्शन   लगा थै रेबीज़ का। ।
***************127****************
हथौड़ा चला गा  संसी चली गै।
मछरी के लोभ मा बंशी चली गै। ।
चौकीदार जागत रहें रात भर
तउ माल्या के साथ करन्सी चली गै। ।
****************128***************
अब एक रुपिया कै भांज नही मिलै।
गिरे के बाद भुंइ मा गाज नही मिलै।।
उंइ अब चुल्लू भर पानी लये ठाढ हें
पै बूड़ै का अटकर अंदाज नही मिलै।।
****************129**************
आयुष्मान का कार्ड धरा है हमरे खीसा मा।
पै दबाई से जादा भरोसा हनुमान चालीसा मा।।
अस्पताल क हाल न पूछा वहै बेजार ही आज।
न बिस्तर न दबा डाकदर कइसा होय इलाज। ।
 महतारी लै रकत कै थइली निगडउरे गभुआर।
अमरित परब आजादी मा देखा फोटो सरकार।
****************130***********************
पुरखा हमरे निता घोंसला बनाऊथे।
रिबाज समाज का हौसला बढ़ाऊथें।।
हम पुरखन के करतब्ब कै बंदना करी थे
ता उंई तर्पन सराध का ढकोसला बताऊथें।।
****************131*******************
वाह रे बुद्धिजीवी।
२६ रु में नाप दी थी गरीबी। ।
जब गरीबो की लगी श्राप।
तो कराने लगे
 महामृत्युंजय  का जाप। ।
****************132*************
पावस का भाग्य फल जैसे नौ  तपा में है।
माँ सी ममता जैसी क्षमता गौ कृपा में है।।
भारत की आन बान और शान के लिये
देश का भविष्य 'हंस 'भाजपा में है। ।
***************133****************
उंइ भस्मासुर मा जातिबाद ह्यारा थें।
राजनीत बोमैं का रेती मा खाद ह्याराथें।।
बड़े गभुआर हें लोकतंत्र के लुच्चा
कुलटन के बस्ती मा मरजाद ह्याराथें।।
**************134******************
जानी थे सुमर आय पै बराह मानी थे।
काहू कै नमूंजी करब गुनाह मानी थे।।
गंगा कबेरी रेबा त मंत्र आंय नहात के
हम बांस बिरबा तक का बाह मानी थे।।
***************135*******************
 भाई  अस  दूसर  नही  जो  भउजाई  बांख  न  होय।
बाउर अस है वा समाज जेखर आपन भाख न होय। ।
बपुरी  जनता  नेम  प्रेम  भाई चारा  से  रहि  तो  लेय
जो हमरे देस मा नफरत कै कारी  अँधिआरी पाख न होय। ।
***************136*******************************
कोऊ सड़क कोउ पट्टी खाय गा।
कोऊ बोरा कोऊ कट्टी खाय गा।।
केत्ती घिनही भूंख बढी मोरे देस मा
कोऊ शौचालय सहित टट्टी खाय गा।।
🌻************137**********🌻
वा बड़ा हुसिआर है नारा बेचा थै।
चोरन का सरदार है पै तारा बेंचा थै।।
हम ओखे शील सोहबत का प्रनाम करी थे
 वा भाई चारा काटैं बाला आरा बेंचा थै।।
**************138*********************
पहिले भइलो अईना  देखा।
धौं  पुन आपन धइना  देखा।।
चश्मा केर पोंछि  के धूधुर  
जनता केर तरइना देखा। ।
**************139*****************
कोऊ आपन उपलब्धी गिनाउथै।
कोउ आपन राज गददी गिनाउथै। ।
रटे है वा मुखागर की को को रात के आबा
दसइयां पिछ्ले चुनाव कै अद्धी गिनाउथै। ।
**************140***********************
केतू भाई अबै समोखी।
कब तक होई फुरा जमोखी। ।
उइं मारय हमरे जमान का
औ हम बुद्ध कै शिक्षा घोखी। ।
***************141*******************
गरीबन का कउनव दल नही होय।
ओखे समिस्या का हल नही होय। ।
वा चाह ज्याखर जिन्दावाद ब्वालय
पै पीरा के ग्रन्थ तरी रहल नही होय। ।
****************142******************
 आबा भाई आँसू पोंछी पचके पचके गाल से।  
नही ता अब वा ओरहन देई पं दीनदयाल से। ।
टूट बडेरी अस जिंदगानी पाछू बइठ समाज के
अजुअव ओढ़काबा है  टटबा जेखे सत्तर साल से। ।
****************143**********************
 वा लोकतंत्र का मंदिर औ विश्वास आय।
समाज का चित्र औ वहै इतिहास आय। ।
ओका दूध से भरा चाह दारू से
आपन सदन त एक गिलास आय। ।
***************144********
 नाच रही ही दुल दुल घोड़ी।
मँहगाई गुंडई कै जोड़ी। ।
अच्छे दिन केत्ती दूरी हें
पूछ रही पापा से मोड़ी। ।
****************145***********
वर्तमान आज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।
दरबारी ताज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।।
पीरा के आँसू अगाधैं उरयाहै का
कवि समाज के साथ ठाढ़ ह्वा थै ।।
****************146***********
अब भ्रष्टाचार कै चर्चा नही चलै।
फलाने कहा थें ओखे बिन परचा नही चलै । ।
भले अजल्याम कै कमाई दबाई मा जा थी
पै ओखे बिन घर का खर्चा नही चलै परचा नही चलै। ।
****************147***************
जब जन सेवक विकास खा रहे हें।
ता बकुला शरम के मारे सल्फास खा रहे हें।।
फियुज बलफ से अजोर का उद्घाटन
बिजली घर सगला प्रकाश खा रहे हें। ।
**************148**************
काहे बगत्या भूखे लांघे।
रात रात उसनीदे  जागे।।
बियांय  का न पजांय का
बरदाँय का आगे आगे। ।   
************149************
 दादू उइ कुहरा का धुँआ बताउथें।
हुलकी का मयारू फुआ बताउथें। ।
जब हप्ता बसूली मा झंझी नही मिली
ता दहला पकड़ का जुआ बताउथें। ।
*************150*********************
चपके रहा जोंक अस।
कायर डरपोक अस। ।
कलिंग के शोक मा
लगत्या है अशोक अस।
************151************************
 हमी जातिवाद का खाँचा न देखाबा।
जनता का नफरत का तमाचा न देखाबा। ।
य देस देखे बइठ है महाभारत के युयुत्स का
अपने वफादारी का साँचा न देखबा। ।
************152*******************
 तुलसी के बगिया मा नकटी कहां से आय गै।
यतना पचामै कै  शक्ती  कहाँ  से  आय  गै  । ।
जे काल्ह तक धरम का अफीम बताउत रहें
वा कुपोषित बिचार मा भक्ती कहां से आय  गै। ।
*************153*************************
 तोहरे प्रेम के चिन्हारी अस।
गउद औ पइनारी अस। ।
सरा  थी   आंसू    मा
जीवन के अमारी अस। ।
**************154***********
दानी ता दानी  उंइ सूम तक का जानाथें।
बड़े अंतरजामी हें बाथरूम तक का जानाथैं।।
उनसे खुई कइ के सुंग कण्व न बनाबा
उंई मंत्र पिंडदान से हूम तक का जानाथैं।।
**************155***********************
गरीबन  का तीज तेउहार नही होय।
ओ से वोट के अलाबा बेउहार नही होय। ।
वा चाह ज्याखर जिन्दावाद बोलय
पै 'रित 'के बिना राम जोहर नही होय।
*************156*********************
 आज काल्ह बिकत खूब माली का माला है।
'हंस 'कहा थें दार मा क़ुछ काला है। ।
उइ बड़े शील सोहबत से बोला थें
लगा थै पुनि के चुनाव आमै बाला है। ।
*************157********************
 जनता सब उनखर करदसना देखा थी।
आपन खोतड़ी  उनखर गोफना देखा थी। ।
उइ नफरत के बीज भरे हें  पेटे  मा
जनता मिल्लस प्रेम के सपना देखा थी। ।
************158*****************
 हाँथे मेहदी पाँव महाउर।
गमकै बासमती अस चाउर। ।
ओंठे माही लगी लिपस्टिक
नैना देख भें बाउर बाउर। ।
***********159********************
 राजनीत का  जलसा देखा।
बिन बाती का  कलशा  देखा। ।
''डेंगू'' का उपचार कइ रहा
मन मा सुलगत करसा देखा  
-----------160----------------
 सलेण्डर के आगी मा राख नही निकरै।
बर्रइया के छतना  मा लाख नही निकरै। ।
जनता कराहा थी भ्रष्टाचार से
औ नेतन के मुँह से भाख नही निकरै। ।
***********161*************************
 राज पथ का पगडण्डिव से  काम परा थै।
महाभारत मा शिखण्डिव  से काम परा थै। ।
तुम हमरे टटबा कै तउहीनी न करा
गाँव मा बोट के मंडीव  से काम परा  थै। ।
************162********************
 कुम्हार के माटी मा कांकर नही होय।
जनता कुरसी कै चाकर नही होय।।
उई बहुरूपियन का जाके बता द्या
समय के केमार मा सॉकर नही होय। ।
************163**********************
 आबा हम गाँव का कोलान देखाई थे।
होन आजादी का बइकलान देखाई थे। ।
जेही तुम वोट कै मण्डी समझत्या है
ओखे गरीबी का चालान देखाई थे। ।
***********164*******************
 देस        से   बड़ी   पार्टी  नही   होय।
जलाशय से बड़ी बाल्टी नही होय। ।
भले   बिभीषन   भक्त   हें राम   के
पै विश्व मा गद्दारन कै आरती नही होय। ।
***********165********************
 जब राजनीत गुंडन का सीट बाँटा थी।
तब   जनता आपन पीठ बाँटा थी। ।
देस मा मजूरन के क्याबा होइ रहे हें
ब्यवस्था भाषन मीठ मीठ बाँटा थी। ।
************166***************
 समाज मा  दहेज़ कै भारी दुकान होथी।
नींद नही आबै जब बिटिया सयान होथी। ।
उई कहिन तै देस से कि भागवत सुनबाउब
हेन किसानन के घर मा गरुड़ पुरान होथी। ।
************167***************************
 हमरे ईमानदारी का रकवा रोज घटा थै।
या खबर बांच बाँच के करेजा फटा थै। ।
जब उनसे पूंछयन ता कहा थें फलाने
चरित्र का प्रमाण पत्र थाने मा बटा थै। ।
************168********************
 रमुआ का पंचर रक्शा धरा है।
औ परछी मा छूँछ बक्सा धरा है। ।
उई कहा थे य विपक्ष कै साजिश आय
हमरे ठई भूख  का नक्शा धरा है.
************169*********************
 दरबारन मा चर्चा ही कम्प्यूटर इंटरनेट  के।
औ खेतन मा मरै किसनमा फंदा गरे लपेट के। ।
केत्तव निकहा बीज होय पै पनपै नही छहेला मा
उनही दइ द्या ठेव सुरिज का दउरै न सरसेट के। ।
*************170***************************
 अपना का छाँड़ा पाप चौराहा मा ठाढ़ है।
बइरी का कहत बाप चौराहा मा ठाढ़ है। ।
कुरसी     कै   भूंख   मुखर्जी  का भूल गै
अब हाथ मल्हा आप वा चौराहा मा ठाढ है। ।
**************171********************
चउकस  गिरा मघावट भाई।
 जिव मा सबके तरावट आई।।
गद्गद भै किसान कै छाती
करिस सजावट धरती माई। ।
*************172******************
उई कहा थें व्यबस्था मा सुधार है।
लगा थै एहिन से फलाने उघार है। ।
नाक मा रुमाल धरे बाटा थें मावजा
जनता के ऊपर उनखर उपकार है। ।
************173*******************
 देस देखे बइठ है रामलीला चउगान का  ।
अपना के घमण्ड औ सत्ता अभिमान का। ।
आज अब जनता के मयारू बने बगत्या है
२६ रुपिया मा तउल्या  तै गरीब खानदान का। ।
**************174**********************
दवाई से ज्यादा है फायदा परहेज मा।
नौ कै  ही  लकड़ी नब्बे बंधेज मा। ।
वहै उई आंसू का व्यापर करइ बाले हें
यहै सब खैरियत ही सरकारी पेज़ मा
*************175*******************
 जब देखा तब रिसान रहत्या है।
घंटाघर कस घडी नसान रहत्या है। ।
पहिले अस प्रेम अपना का फसफसाय नही
घुटकी भर पी के बसान रहत्या है। ।
*************176*******************
दरबारन मा चर्चा ही कम्पूटर इंटरनेट के।  
खरिहनन मा मरै किसनमा फन्दा गरे लपेट के।  ।  
प्रेमचन्द के होरी का उइं उँगरी धरे बताउथें
द्याखा भइलो ताज महल औ चित्र इंडिया गेट के ।  
************177**************************
उइ कुरसी का खेल  अक्कड़ बक्कड समझा थें।
जनता का निगबर फक्कड़ समझा थें। ।
चले आउ थें बेशर्मी से बोतल लये बस्ती मा
हमरे लोकतंत्र का पियक्कड़ समझा थें। ।
************178**********************
देस टकटकी लगाये है काले धन के आस कै।
अब 'बाबा जी 'बात करा थें चमनप्रास कै। ।
घुटकी भर खाय के दिल्ली डकारा थी
देस का बताउथी महातिम उपास कै। ।
*************179*******************
 भले जीभ दार है पै मकुना मउना है।
एहिन से  ओही सइघ नही अउना पउना है।।
पड़बा है काहे दूबर य बात दिल्ली जाना थी
दुधारु लोकतंत्र के पडउना का थमाउना है। ।
************180**************************
समय कै घूमत चकरी द्याखा।
गुंडन कै पैपखरी द्याखा। ।
पीपर अस आक्सीजन देतीं
गुण्डा घर अस बखरी द्याखा। ।
*************181******************
उइ देस के गरीबी का व्यास नापा थें।
भूखी गंडाही कै अकरास नापा थें।।
पखना जमे का घमण्ड देख ल्या
''सम्पाती ''सुरिज का अक्कास नापा थें। ।
*************182********************
हम जानी  थे उइ भण्डा सराध करय आये हें।
आँधियार सुरिज कै सराध करय आये हें।।
एक बेर ठगा गा विंध्य ता निहुरा है झुकेही मा
उइ पुनि के ''अगस्त''अस अपराध करय आये हें।।
**************183*************************
 दादू भांगर भइला होइ गा।
उज्जर तक मटमइला होइ गा।
हम जेही बज्जुर का मान्यन
फाट  के चइला चइला गा। ।
*************184******************
धम्मन फट गा हरमुनिया का।
ह्यरा भाई कहूँ गुनिया का। ।
जे भाई चारा के सरगम से
रंजे रह्य पूरी दुनिया का। ।
**************185***********
हम सब उनखर छक्का पंजा जानी थे।
अब को माजी चाह का गंजा जानी थे। ।
जब उनखे मूड़े बीत ता हम बिदुरात रहयन
अब हमरे घुटकी कसी शिकंजा जानी थे। ।
**************186*****************
 जिसने सर्व धर्म सदभाव को समेटा है।
जिसने लघु भारत के रूप को लपेटा है। ।
उस मैहर की पुण्य भूमि को देव तक नमन करते
जहां शारदा सी माँ अलाउद्दीन सा बेटा है। ।
**************187********************
 चन्दन गंधा थै ता होरसा का कउन दोख है।
नाली भठी ही ता बरसा का कउन दोख है। ।
जब सहस्त्राबाहु अत्याचार कई रहा है
तब परसराम के परसा का कउन दोख है। ।
**************188*******************
टेक्टर जब से आबा ता बरदा हेराय गें ।
गाँव   के  रीढ़   का   गरदा    हेराय  गें ।।
अब चाल चेहरा चरित्र कै चरचा नहीं चलै
घिनहा पानी निकरैं का नरदा हेराय गें । ।  
***************189******************
 उई शबरी के बेर का अमचुर बना के बेंचा थें।
सरासरीहन लबरी का फुर बना के बेंचा थें। ।
जे जीते के बाद हार गें जनता के विश्वास से
अइसा कायर का बहादुर बना के बेंचा थें। ।
***************190********************
 आजादी से अजुअव तक वइसै फटी ही कथरी।
भारत देस हमारै  आय रहय का नहि आय बखरी। ।
देखा एक नजर जनतै पुन देखा आपन ठाठ।
दस दस मोटर तोहरे दुअरा हमरे टुटही खाट। ।
कब तक हम अपना का ढोई लहकै लाग है कन्धा।
तुहिन बताबा राजनीत अब सेवा आय कि धन्धा। ।
***************191********************
 आबा हम गाँव का कोलान देखाई थे।
होन आजादी का बइकलान देखाई थे। ।
जेही तुम वोट कै मण्डी समझत्या है
ओखे गरीबी का चालान देखाई थे। ।
***************192*******************
कोऊ लहुर बनै का तयार नहि आय।
चल चली हेन प्रेम कै बयार नहि आय। ।
उनखे घर मा संगमरमर जड़ा है
मिर्रा के घर मा मयार नहि आय। ।
***************193***************
ग़रीब कै मढ़ैया बरसा  उधेर लीन्हिस ।
मंहगाई मनई का चरसा उधेर लीन्हिस ।।
मलागिर खिआय गा घिस घिस के हंस
चंदन कै गमक सगली ह्वरसा उधेर लीन्हिस। ।
*************194*******************
 दुइ  औ  दुइ  सब  दिन  चार नहीं होय।
भ्रस्टाचार  कबहूँ  गभुआर  नहीं होय।।
बपुरे निरदोस जब मराथें  अकाल मउत
दरबारी कहाथें जुर्मी  सरकार नहीं होय।।    
*************195*******************
भुंइ  हमार  मंदिर  आय  भूत  का  चउरा  न होय।
या पुरखन कै थाती, धन्ना सेठ का कउरा न होय।।
हमहीं    या   धरती     माता    से      कम      नहीं
लिलारे का चन्दन आय देह का खउरा  न होय ।  ।   
*************196*********************
किसान बिचारा   खाद     का    तरसा   थै।
निर्बल  बपुरा  फरिआद    का   तरसा थै।।  
कोऊ जीबन  काटा रहा है  बृद्धाआश्रम मा
औ कोऊ ता बपुरा हेन अउलाद का तरसा थै।।
*************197***************************
हम समाज के मिल्लस कै आसा  करी  थे।
ता अपना हमरे ऊपर इस्तगांसा  करी थे।।
बहुरुपियव लजाय जाय अपना का देख के
निकहा नाटक नेरुआ  औ  तमासा करी थे। ।  
*************198*********************
जब कबहूं द्याखा थी ता वा आधा द्याखा थी।
राजनीत ता केबल आपन बाधा द्याखा थी।।   
कोऊ बइठय  सिंघासन के गरू पालकी मा
जनता लहकत लोकतंत्र का कांधा द्याखा थी। ।
*************199**********************
उइ अपने  का रास्टीय  पाल्टी बताउथें।  
गिलास  अपने आप का बाल्टी बताउथें।।
देस भर मा उनखर जब खासा बिज मरी भै
ता उइ नकली बीज कै  क्वालटी  बताउथें। ।
************200********************
 जब समाज में अराजकता होती है।
तब जनता अपनी स्वयं प्रवक्ता होती है। ।
सिंघासन की बुनियादें हिलने लगती हैं
पश्चाताप के बियावान  में सत्ता सोती है। ।
***********201**********************
जानता हूँ कल कलम की लाश मिलेगी।
लेखनी की टूटी हुई साँस मिलेगी। ।
भ्रष्टाचारियों के स्मारक बनेंगे
देश भक्तों की चिता पे घास मिलेगी। ।
***********202************************
 जिसने सर्व धर्म सदभाव को समेटा है।
जिसने लघु भारत के रूप को लपेटा है। ।
उस मैहर की पुण्य भूमि को देव तक नमन करते
जहां शारदा सी माँ अलाउद्दीन सा बेटा है। ।
***********203*************************
 ये न समझो कि बड़ा बदलाव होने वाला है।
महगाई का और नीचे भाव होने बाला है । ।
राजनीत गिरती तो  साहित्य थाम लेता था  
अब उल्लुओं की पालकी हंस ढोने वाला है। ।
***********204************************
 जिसकी छाती दहक रही है उसके अंतर मन से पूंछ।
वृक्ष कटे जिन अरमानों के तू उस नंदनवन से पूंछ। ।
सुविधाओ से लवारेज है फिर भी चैन नदारत है
सुखा दिया है क्यों तेरा सुख उत्तर अपने धन से पूंछ। ।
************205******************************
ये मेरे देश में आज के कवि का चरित्र है।
जिसकी कविता का निमित्त मात्र वित्त है। ।
वह देश भक्त सा दिखता है मंच में
पैसे के लिए वह लिखता कवित्र है। ।
************206***********************
 व्यवसायिक साझेदार हों जहां विपक्ष के लोग।
दूर करेंगे खाक वे भ्रष्टाचार का रोग। ।
 भ्रष्टाचार का रोग पनपता गहरी जड़ में।
जैसे लगता जंग बन्धु लोहे के छड़ में। ।
नाटक देखो कोस रहे वो पकड़ के माइक।
सिद्धान्तों की बलि लेता है हित व्यवसायिक। ।
************207******************************
 जनता से बड़ कर नही लोकतंत्र में धाक।
जनगण से गुर्राये तो फिर रगड़ो गे नाक। ।
फिर  रगड़ोगे   नाक   घूमते   रैली  रैली।
एक  बार  छवि यदि  हो  जाये  मटमैली।।
''हंस'' खेलने लगती है फिर वह गुड़गंता।
लोकतंत्र  में  सर्वोपरि  होती  है  जनता।।
************208**************************
 टीस उठती है तन के पोर पोर से।
जब बादल को खतरा वे बताते है मोर से। ।
ये मेरे देश की विडंबना है दोस्तो
हम देश भक्ति सीखते है भष्टों से  चोर से।।
***********209***********************
 कोठी मढ़ैया से यारी कर रही है।
लगता है चुनाव की तैयारी कर रही है। ।
लकड़ी से दीमक की सहानुभूति देखिये
खोखला कर के चित्रकारी  कर रही है। ।
************210*********************
 तुमने गरीबी देखी  है !  भोगी नही है।
तू ए सी का डिब्बा है जनरल बोगी नही है। ।
देख भाल करने आया है बीमार की
अस्पताल में बैठा है किन्तु रोगी नही है। ।
***********************************
*************211**********************
कोऊ सहीद बनै का नहन्नी लये बागा थें।
रूपया के जुग मा चरन्नी  लये बागा थें।।
अपने   आँखी   कै  फूली  नहीं  झांकय
आने का चरित्त छानैं का छन्नी लये बागा थें।।  
************212**************************
उंइ  अउठा मा पहिर के पइंती देखाउथें।
पसीना   के  पूत  का   गइंती   देखाउथे। ।
जे भस्टाचार  के  जमानत  मा  बाहर हें  
ओऊ  सदाचार  कै  तइंती    देखाउथे। ।
************213*******************
गइया  कहाँ  रही  अब सुमर बताउथें।
लिपटिस बरा पीपर कै उमर बताउथें।।
ज्याखर दुइ बोरी चाउर मा नेत ड्वाला थी
उंइ  अपने का भारत का कुमर बताउथें।।
*************214********************
उंइ बइहर औ धुआ बताऊथे।
एक दुसरे कै खुआ बताऊ थें।।
जनता के मुद्दा गें होरी मा भाई
कोउ परेबा कोउ सुआ बताऊ थें ।।
*************215*****************
रेशम छुइस चरखा ता खादी होइगा।
पुन छिन भरेन मा  वा फसादी होइगा।।
गउतम के देस मा अंगुलिमान का मंदिर
उंइ कांच का कहा थें फउलादी होइगा।।
************216*****************
हम कविता लिखय का व्याकरण नही बांची।
काहू का लिहाज   औ  आकरन नही बाँची। ।
हम देखी थे समाज के आँसू औ पीरा
छंद लिखय का गण चरण नही बाँची। ।
************217*******************
उंइ  अउठा मा पहिर के पइंती देखाउथें।
पसीना   के  पूत  का   गइंती   देखाउथे। ।
जे भस्टाचार  के  जमानत  मा  बाहर हें  
ओऊ  सदाचार  कै  तइंती    देखाउथे। ।
***********218*******************
देस देखे बइठ है रामलीला चउगान का  ।
अपना के घमण्ड औ सत्ता अभिमान का। ।
आज अब जनता के मयारू बने बगत्या है
२६ रुपिया मा तउल्या  तै गरीब खानदान का। ।
***********219************************
अपना पंचेन का नबा साल कै  बधाई।
उनखे मुँह कलाकंद हमरे निता लाई।।
राजधानी सजी ही ढाका के मलमल से
औ हमरे गॉंव कै खुली  ही  तुरपाई। । 
**********220************************
हेन नफरत कै दुकान नहीं ,पूर कारखाना है।
चीन के मानस पूतन का ओखे निता थाना है।।
उनखर उद्देस है समाज का लड़बाउब
गरीबन का उपरउझा ता एकठे बहाना है।। 
**************221******************************* 
भारत माता काही गरब है अपने अटलबिहारी का।
जुग गाई उनखर गुन गाँथा थाती धरे चिन्हारी का। ।
जब जब नेतन कै बात चली ता भारत माता यहै कही
देखा अपने अंतस का पुन देखा अटलबिहारी का। । 
***************222****************************** 
अबै ता या कमीनापन आय नंगई बांकी ही ।
किलनी लगी है , बगई बांकी ही ।।
उइ सीला सपोटी मा चेरुअय भर पकड़िन ।
घुटकी दबामैं कै , दबंगई बांकी ही। ।
**************223*************************
गरीबन के दिल है दल नही होय।
ओखे समिस्या का हल नही होय। ।
वा चाह ज्याखर जिन्दावाद ब्वालय
पै पीरा के ग्रन्थ तरी रहल नही होय। ।
************224****************** 
राबन जब राजा बना, दीन्हिस बनै कनून।
जेखे टेक्स कै जर नहीं, वखार लइ ल्या खून।।
वखार लइ ल्या खून चली न कउनव वाठर।
जनता का ल्या चूस बचै बस केबल ढाठर।।
डिग्गी बज गय देस भरे मा गांवन गांवन।
गेट औ टटबा एक भाव सब द्याखै राबन।। 
*************225**************** 
आंखी माही पट्टी बांधे न्याव कै देवी है।
वा भले निगरानी शुदा है पै समाजसेवी है ।।
जब से राजनीत मा अपराधी सकान हें
तब से लागा थै कि हर दरबार फउरेबी है ।।
*************226**********************
पसीना का ठगि के वा बइठ हबै भिट्ठा मा। कइउ ठे लजुरी खिआनी है घिट्टा मा । । सेंतय का जरा बरा जाथै कमेसुर वा गदहा परेसान है गइया के प्रतिष्ठा मा । । हमरे नुकसान केर डाँड़ बांकी है। दुस्ट औ कृतघ्न कै दुइ फांड़ बांकी है।। जोकर उपाय कइ सब हीच चुके हैं फलाने कहि रहें हें की भाँड़ बांकी है। । हमी रूप से का मतलब, हम ता आंखर मा रीझे हन। बानी के मंत्र लिखे कागद, हम मस मा खूब पसीझे हन।। तुम प्रेम पिआसी पिंगला ता , हम उदासीन भरथरी हयन तुम्ही शुभ होय तुम्हार प्रेम, हम ता आंसू मा भींजे हन।। उइ जेही छूइ देथें वा सोन बन जाथै । खारा पानी जम के नोन बन जाथै ।। जादा ना सताबा कउनव गरीब का अपमान पी के एक दिन वा द्रोन बन जाथै ।।
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धन्न है! अपना बतिया का गादर करी थे। हम अपना के कला का आदर करी थे। । य नंगई के बड़प्पन का सादर प्रनाम है जउन सिगरिट के धुँआ से बादर करी थे ।। हेमराज हंस
 
 
 
 
 
 










 












 

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2022

DOHA KHAND ____ 310 DOHE BAGHELI DOHA

  जय गनेस सब जन कही जय जय उमा महेश।
सिउ जी के परिवार,  अस  सुखी  रहय य देस।।
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 गनपति  जू  हैं  देस मा, रास्ट  बाद  के मान। 
साक्षी  है  पूना  अबै , अउर तिलककै आन। ।
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भरिन तिलक जी भक्ति मा, देस भक्ति का रंग। 
जग  मा  न  हेरे  मिली ,  या  इतिहास   प्रसंग। ।।
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रिद्धि सिद्धि सुभ लाभ लै ,आबा हे गनराज। 
अपना का स्वागत करै ,भारत केर समाज। ।
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धन्न  राष्ट्र  के  रीत  का , धन्न है भारत देस। 
देस भक्ति के रूप मा ,हाजिर स्वयं गनेस। ।
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*******      2*****************
 राम कबिन  का  शब्द हैं ,राम संत का ब्रम्ह। 
हुलकी काही आग हें ,औ प्रहलाद का खंभ। । 
********      3**************
राम देस के प्रान औ, राम बिश्व के गर्व। 
राम ऋचा ऋगवेद कै  साम यजुर्व अथर्व। । 
********     4*****************
राघव मरजादा दिहिन, औ माधव जी कर्म।
दुइ लीखन मा चलि रहा,सत्य सनातन धर्म।।  
********     5*******************
रिमझिम बदरी कइ रही भींजै नगरी गाँव। 
मानो भादव कइ रहा कान्हा जनम उराव।। 
--------      6-----------------
महादेव  हैं बिश्व मा, समता बादी ईश।
चाहे पूजैं  राम जू ,या  पूजै दशशीश। ।  
**************7*******************
बेल पत्र गंगा जली चाउर चंदन रास। 
शंकर जी पूजैं लगा भारत का बिस्वास ।। 
****************8*******************
कासी पुनि के सजी ही,दुइ सौ सालन बाद। 
गुंजै डमरू  शंख  औ,  हर हर  भोले  नाद। । 
--------     --9-------------------
 किहिस  सनातन सब दिना, जन मंगल का गान। 
प्राणी  मा  सद भावना,   बिस्व   केर    कल्यान।।
**********     10********************
भिन्न भिन्न भाखा हईं ,अलग अलग है भेस।      
एक  सनातन मा  गुहा , पूरा  भारत  देस।। 
**********    11*****************
देस भक्ति औ धरम कै, मूल भाबना एक। 
उत्तर कै गंगा करै ,दाख्खिन का अभिषेक। ।
****************12*********************
तीर्थ  हमारे  देश में,  हैं  संस्कृति  के  अक्ष।
वसुधैव कुटुम्बं भावना , जिनका पावन लक्ष।। 
****************13**************
चह कामिल बुल्के रहैं या रहिमन रसखान। 
सब कै मासियानी लिखिस भारत का गन गान। ।   
*********    14*****************
उनही सौ सौ नमन जे कीन्हिन जीबन हूम। 
बंदे मातरं बोल के गें फाँसी मा झूम।। 
-------     15-----------------
जिनखे माथे पूर भा आजादी का जग्ग। 
हम भारत बासी हयन उनखर रिनी कृतग्ग।। 
--------    16--------------------
शासक जब करने लगे शोषण अत्याचार। 
ईश्वर को लेना पड़ा परसुराम अवतार। । 
*********   17******************
गाँव नगर पूजन भजन दुर्गा जी का बास। 
कहूं राम लीला शुरू कहूं कृष्ण कै रास। । 
---------   18------------------
 जहां बिराजीं सारदा धन्न मइहर कै भूम।   
भक्तन का तांता लगा नाचत गाबत झूम।। 
-------------19------------------------
जहाँ बिराजीं शारदा धन्न  मइहर का भाग। 
बंदूखै तक बन गईं नल तरङ्ग का राग।।   
--------   20--------------
पाबन मइहर धाम है  सिद्ध  शारदा पीठ। 
कोउ बाहन से जा रहा कोउ  आबै हीट। । 
--------   21-------------
माता जू किरपा किहिन बइठीं आके कंठ।            
तब कविता गामैं लगा हेमराज अस लंठ।।
--------   22--------------
 गाँव -गाँव मा जबा देबारे पंडा दे थें हूम। 
लोक धरम कै चैत मा चारिव कईतीधूम। । 
-------   23------------
आठैं   अठमाइन   चढ़ै  खेर  खूंट  का   भोग। 
जलसा का कलसा धरे ''राम जनम का जोग ''। ।  
-------   24-------------
बाना खप्पड़ कालका जबा देवारे हांक। 
बिन प्रचार के चल रही लोक धर्म कै धाक।
-------    25---------------
गाँव गाँव   बोबा   जबा  पंडा  दे  थें  हूम।
लोक धरम कै देस  मा चारिव कइती धूम।। 
 -------  26----------------
नारी सूचक गालियां दिन भर देते साठ। 
वे भी सादर कर रहे दुर्गा जी का पाठ।। 
--------  27    --------------
इंदिरा सुषमा  चावला, औ मेधा अस तेज। 
हे ईशुर मोरे देस मा, पुन  पुन उनही भेज।। 
***********28*********************
या लोपा  मुद्रा  गारगी , मैत्रेयी  का  देस। 
जहां नारि कै ताड़ना, अत्याचार कलेस। । 
***********29**********************
द्याखा मध्य प्रदेश मा, नारी का सम्मान। 
अब महिला के हाथ मा, मदिरा केर दुकान। ।
***********30********************** 
 बिटिआ बेदन कै  ऋचा साच्छात इस्लोक।
दुइ कुल का पामन करइ अउ साथै मा  कोंख।।
**पर्यावरण  के दोहा  31**************
 परयाबरनी प्रेम कै देखी भारतीय खोज। 
अमरा के छहियां करी अपना पंचे भोज।। 
 -----      32--------------
पीपर  मा  बसदेव  जू  बधी  बरा के सूत। 
तुलसी  जू  कै  आरती  आमा मानैं पूत।। 
--------    33---------------
नीम बिराजैं सीतला औ जल बरुन का बास। 
परयाबरन  मा  पुस्ट  है  भारत का बिस्वास।।
---------   34----------------- 
हमरे  भारत  का  रहै  चह  कउनौ  तेउहार।
सब दिन हम पूजत रह्यन बिरबा नदी पहार। ।
--------   35-------------------
फुन्नी ता चिकनान ही लगा है जर मा रोग।
भारत अउर बसंत का या कइसा संजोग। । 
********   36******************
युग नायक होते नही किसी जाति में कैद। 
वे बीमार समाज के हैं शुभ चिंतक वैद। ।  
*********   37*******************
बिन  गोनरी गगरी धरे रही प्यास का साध। 
तोहरे निता श्रृंगार रस ओखे जिव का ब्याध। । 
----------  38----------------------
कहूं कहूं बूड़ा चढा भरे खेत औ ताल। 
हमरे बिंध मा चल रही बदरी कै हरताल।। 
---------   39-------------
न सामन कै हरिअरी न नदिअन मा धार। 
बइठ किसनमा मेंड़ मा गदिआ धरे कपार।। 
-00000-----40-------------------
दादू के सुख संच मा जे मानय आनंद। 
अम्मा अस कउनौ नहीं दुनिआ का संबंध।। 
************41*****************
अम्मा अपने आप मा सबसे पाबन ग्रंथ। 
माता से बढि के नही कउनौ ज्ञानी पंथ।। 
-00000   42--------------------
 चीता   आबा   देस  मा   सीगट   भा     नाराज।                   
 कहिस कि अब कइसा बनब जंगल का महराज। । 
----------- 43-------------------
  सीगट कै ही चाहना रहै जंगली शान।     
बन का राजा जब रहै सीगट लोखरी श्वान। ।
************44**************************
जंगल मा साहुत बनी ,सीगट लोखरी केर। 
देख  देख  बिदुरा  थै ,बन  का  राजा शेर।।  
---------    45-----------------
दहसत माही कलम ही, कागद करै रिपोट। 
राजनीत कब तक करी, गुंडन केर सपोट।। 
--------    46------------------
चक्की पीसैं के निता लालू धधे रिसान। 
ताकी जनता का मिलै ठाहर सुद्ध पिसान।। 
-------------47------------------------
काहू का घंटा बजै औ काहू का ढोल। 
पै किसान के खेत से होइगै यूरिया गोल।। 
-------   -48------------------
जय जय पाबन अबध कै जय जय भारत बर्ष। 
मंदिर के निरमान का जन जन मा है हर्ष।। 
-------    49--------------------
कृष्णपक्ष भादव दुइज का दिन सुभ भा बाह।
 जब  पूंछी  इतिहास     ता  देई  वहै   गवाह।। 
-------    50-------------------
सदिअन के बलिदान का आजु मिला तै मान। 
अबधपुरी मा सुरू भा मंदिर का निरमान।। 
---------  51-------------------
केत्तेव पुरखा गुजरिगें लये हिदय मा हूक। 
आजु तृप्त भै आतिमा लउलितिया कै भूख।। 
-----------52----------------
अपने रीत रिबाज से ओही आबै बास। 
ज्याखर गुरुद्वारा हबै चीनी दूताबास।। 
-----------53-----------
राम देस के प्रान औ राम राष्ट के गर्व। 
राम ऋचा ऋग्वेद कै साम यजुर्व अथर्व।। 
----------54--------------
अब भादों के चउथ का होय दुइज से ईस। 
वा कलंक ढोउत फिरै या सुभ सुदिन रहीस।। 
-----------55---------------
पुन स्थापित अबध मा राम सहित सब अंस। 
पूरी दुनिया कइ रही जय जय भारत बंस।। 
-----------56--------------
भले करोना काल है, पै संबत सुभ नीक। 
पूर पांच सै बरिस मा अबध कै भै तस्दीक।। 
------------57-----------------
हमरे भारत देस मा कबिता बड़ी लोलार। 
छत्रसाल राजा बने कबिता केर कहार।।
------------58---------------------- 
मन माही माहुर भरे मुंह मिसरी अस मीठ। 
अपना के बेउहार का लगै कहूं न डीठ।। 
-----------59------------------------
हमरे देस मा होइ चुके अइसा निर्मल गाँव। 
लोटिआ लै बाहर चलीं बहू बराये पांव।। 
----------60-----------------------
 चाह वाम पंथी रहै य दाम पंथ के ढ़ोंग।
शोषन किहिन गरीब का जइसा घेंटी घोंग।।
----------61----------------------
गाँव गाँव आमै लगा जबसे य अख़बार। 
मिर्रा तक जानैं लगा सब आपन अधिकार। । 
-----------62--------------------------
बड़े जबर संगठन हें जात बाद के हेत। 
तउ बिटिया के बाप का बिकिगा सगला खेत। । 
----------63--------------------------
 पता नही कउने जघा को कर दे इंसल्ट 
घर से निकरा पहिर के बिन कालर कै सल्ट। । 
----------64-------------------------
 बड़ा भयानक लगि रहा लोकतंत्र का चित्र। 
गंधइलन  के कान मा खोंसा फूहा इत्र  । । 
-----------65--------------------
जेखे पीठे म बजा बारां का घरियार। 
ओहिन की दारी सुरिज कढ़ई खूब अबिआर। 
-----------66-------------------------
 पेटहा जब मुखिया बना लुक लुक के खुब खाय। 
अस्पताल   हिंठै  लगा  तउ न  मन पछताय। । 
----------67--------------------------
 राखी  टठिया मा धरे बहिनी तकै  दुआर। 
रक्षा बंधन के दिना  उई पहुंचे ससुरार।।
----------68-----------------                       
खजुलैया लइके मिला  लडकइया का प्रेम। 
देखतै  जिव हरिआय गा बिसरा सगला नेम।।
-----------69------------------
खजुलइयां लइके मिला, हमरे गांव का नेम। 
द्यखतै जिव हरिआय गा,  परिपाटी का प्रेम।। 
        70              
सनकिन सनकी बात भै आगू पाछू देख। 
आँसू माही भीज गय  तब काजर कै रेख ।।
        71            
हाथे मा मेंहदी रची लगा महाउर  पाँव। 
सावन मा गामै लगा कजरी सगला गांव।।
----------  72----------------------
 पाथर  परिगा   फसल मा   अब  भा मरे बिहान। 
हाय !!दइव !या का किहा कहि के गिरा किसान। ।
*************73********************
करहा  आमा  नीझरि  गा  ठूठ  ठाढ़  मउहार। 
चौपट होइ गै फसल सब अइसा मारिस वार। ।   
*************74****************        
टप टप अँसुआ बहि रहें खेतिहर परा सिकिस्त। 
खाद बीज का ऋण चढ़ा औ टेक्टर कै क़िस्त। । 
----------   75-------------------
 चाहे हेन ज्याखर रहै सत्ता औ सरकार। 
कउन गडारी गाडरय नही बनाबै बार। । 
---------    76---------------------------
बहुत बड़े धर्मात्मा बड्डे धन्ना सेठ। 
पै ओखर नोकर रहैं बपुरे भूखे पेट।। 
----------77------------------------------
पिछले सत्तर साल से ठगी गै जनता खूब। 
नेतन कै गोनियाँ लदी जंतै दोनियाँ दूब। । 
----------78------------------------
आरव मिला चुनाव का जागा जनगण देव। 
राजनीत ख्यालैं लगी मेर मेर फउरेब। । 
----------79--------------------------
कोऊ गाना गा रहा मारै कोऊ गोहार। 
राजनीत मा रंजा  है विंध्य का दक्खिन द्वार।। 
-----------80--------------------------
गाहिंज करै गरीब कै करय दीन का ख्याल। 
'अन्त्योदय' के मंत्र हें पंडित दीनदयाल। । 
----------81-------------------------
जे   कबहूँ  खाइन  नही,  रोटी  भाई  साथ।
देस मा उइ बांटत फिरैं  जगन्नाथ का भात। ।
---------  82--------------------------
 बेउहर के भीती  लिखा ''अति गरीब परिवार ''।  
   पानी पानी होइ रही बाँच बाँच सरकार।
-----------83--------------------------
 खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल। 
कूलर से बिजना कहिस जान्या हमरिव मोल। । 
-----------84---------------------------
 मुंह माही महिपर धरे मन मा भरे कुनैन। 
अहित करै जे आन का ओही सुक्ख न चैन। । 
-----------85-------------------------
 हमरे देस मा चलि रहा  नशा मुक्ति अभियान। 
आधी रात तक अब खुली मदिरा केर दुकान। । 
-----------86-----------------------
मघा नखत बदरी करय धरती का खुशहाल।
महतारी  के  हाथ  कै  जइसा  परसी  थाल।।  
        87
ऊपर दउअय रुठि गा औ नीचे दरबार।
धरती पुत्र किसान कै को अब सुनै गोहर। । 
----------88----------------------------
 धन्ना  सेठन  के  निता  गर्मी बरखा जाड़।
हमही एक मउसम हबै रोटी केर जुगाड़। । 
       89
कउड़ा के नियरे संघर अपना सेकी देह।
हम धांधर के आग का लिखी उरेह उरेह।। 
       90
फसलन मा पाला लगा परी ठंड कै मार।
भितरघात मउसम करै खेत कहै आभार।।
----------91--------------------------
 नेता   जी  के  नाव  से  उभरै  चित्र  सुभाष।
अब के नेता लगि रहें जइसा नहा मा  फांस।। 
-----------92-------------------------
 चुटकी भर के ज्ञान का झउआ भर परमान।
तउअव अपने आप का हंस कहै बिद्वान।।  
------------93-------------------------
सब्द बह्म का रूप है सब्द धरै जब भेष। 
मैहर मा एक संत हें  पंडित   रामनरेश।। 
000000----94--000000000000
             विवेका नंद
पूज   विवेकानंद  मा  है  भारत  का  गर्व।
उनखे बसकट मा रमा जुवा दिवस का पर्व।।
---------  95----------------------
रचिन  विवेकानंद  जी एक  नबा इतिहास।
भारत  केर  महानता  का   बगरा  परकास।।
---------96------------------
जुरे  शिकागो  मा रहें  दुनिया  के  बिद्वान।
एक सुर मा ब्वालैं लगें जय जय हिन्दुस्तान।।
------------97-----------------
चाह    शंकराचार   हों   चाह   विवेका नंद।
भारत के जसगान का रचिन ऋचा औ छंद।।
------------98----------------------------
अस छरकाहिल मनई भा निठमोहिल  बेउहार।
अब  ता  कारिव  के  परे  हिरकै  नहीं   दुआर।।  
------------99-----------------------
पूरी दुनिया कइ रही जउने रंझ बिलाप। 
कारन लुच्चा चाइना गुड़ का कोल्हू बाप।। 
         100
बिस्व मा हाहाकार है धरी मउत कै सीन ।
वाखर जुम्मेदार है घिनहा घाती चीन।। 
          101
दुस्ट चाइना बिस्व मा छोड़िस अइसा गाज। 
त्राहि त्राहि जनता करै किलपै सकल समाज।
-----------102--------------------------
नीच चीन के पाप का, देस रहा है भोग। 
रजधानी से गाँव तक बगरा छुतिहा रोग।। 
       103
कहां बची केसे बची, लुकी कहां ठे ओंट।
पेट धंधा से लगि रहा, हमी करोना छोटे।। 
----------104-------------------------------
 कहां धरोगे ऎसे धन को जिसमें लगी हो आह। 
स्वयं ढूढ़ता वह चलने को घर में बारह राह।  
----------105---------------------------
 सूरज नेता विश्व का सबका पालनहार। 
मानसून हित तिप रहा करने को उपकार। । 
----------106------------------------------
 जले घाव पर हो रहा मिर्ची का आघात। 
जैसे कोई पूंछ रहा हो 'भीमराव 'से जात। । 
-----------107---------------------
 जहाँ व्यवस्था ने कसी कस्तूरी  की घींच। 
माणिक दादा ने कहा  उच्च कोटि के नीच। । 
------------108------------------------
आंसू आह कराह वेदना औ पीरा संत्रास। 
श्रम सीकर की टीस से होता सत्यानाश। । 
-----------109----------------------
जब तक मिल जाता नहीं अपना विन्ध प्रदेश।
गंगा अजीज चिंतालि को श्रद्धांजलि है शेष।।
-----------110---------------------
अचरा मां ममता धरे, नयनन धरे सनेह।
माँ शारद आशीश दे,शक्‍ति समावे देह॥
-----------111
रहिमन पनही राखिये,बिन पनही सब सून।
दिल्‍ली से है  गांव  तक, पनही  का कानून॥
       112
गोबर से कंडा बनै, औ गोबरै सेे गउर।
आपन आपन मान है,अपने अपने ठउर॥
       113
जेखे पीठे मां बजा,बारा का धरियार।
ओहिन की दारी सुरिज,कणै खूब अबियार॥
       114
रजधानी मां गहग़़डडृव,खूब पटाखा फूट।
बपुरे हमरे गांव के,धरी बडेरी टूट॥
       115
हमरे लोक के तंत्र का,देखा त अंधेर।
साहब आगू भींज बिलारी,चपरासी का शेर॥
       116
गददारी उंइ करथें, खांय देस का नून।
लोकतंत्र के देह मां,भ्रस्‍टाचार का खून॥
       117
गदियन मां मेहदी रची,लगा महाउर पांव।
सावन मां गामय लगा,कजरी सगला गांव॥
       118
अस कागद के फूल मां,गमकैं लाग बसंत।
जस पियरी पहिरे छलै,पंचवटी का संत।
       119
जुगनू जब खेलिस जुआं,लगी जोधइया दांव।
पुनमांसी पकडै.लगी,अधियारे के पांव ॥
---------120 -----------------
बड़े अदब से बोलिए, उनखर जयजयकार। 
लोकल गुंडन कै हियां चलत हिबै सरकार ।। 
*********************************
मुलुर मुलुर जनता लखै , बन के बाउर मूक। 
साइत ज्यतबव जाय उड़ , अउर जोर से फूंक। । 
       121
हा हजूर हम गॉव के शुद्ध देहाती ठेठ। 
अपना अस काटी  नहीं हम गरीब का पेट। । 
       122
चह कामिल बुल्के रहैं या रहिमन रसखान। 
सब कै मासियानी लिखिस भारत का गन गान। । 
       123
भारत के मरजाद कै जेहि न एकव ग्यान। 
तउ चाहा थी ''हेलना'',   बेटा  बनै  महान। । 
       124
सदा  गरीबों  ने  लड़ा लोक  धर्म  का  युद्ध। 
पर कुलीन की कोख से आये सब दिन बुद्ध।। 
        125 
मॅहगाई मा एक सम ही सब कै सरकार। 
कउन गड़ारी  गड़ारै नहीं बनाबै बार। । 
----------126-----------------
जे आफत मा कइ रहें आपन उल्लू सीध। 
उइ दानव से नीक हें हमरे देस के गीध।।  
-----------127------------------
शासक जब करने लगे शोषण अत्याचार। 
ईश्वर को लेना पड़ा परसुराम अवतार। । 
----------116--------------------
मिला सदा इस देश को बिप्र का आशीर्वाद। 
चाहे परसुराम हों य मंगल अटल अजाद।
---------128----------------
ठाँव ठाँव करी परी बढ़े करोना केस । 
भारत माता बिकल ही बांच सोक संदेस। ।
**********129********************
मिली  करोना  कै  दबा,  बरियत्तन  हे राम। 
अब ता चीन के पाप का, होई काम तमाम।। 
***********130*************************
परी  करोना  रोग  कै,  दुनिया  भर  मा हाक।
मुँह मा मुसका बांध के, दुइ गज रखी फराक।।   
************131**********************      
शुभ सदेश मिलते नहीं कहीं किसी भी ठौर। 
हे ! प्रभु कब तक चलेगा श्रद्धांजलि का दौर। । 
************132*************************     
बढ़ा करोना का कहर सावधान प्रिय मीत। 
मुंह ढकें दूरी रखें होगी अपनी जीत। । 
***********133***********************      
देख रहा है देस या उनहूँ कै करतूत। 
माओ बदिन के निता जे हैं साहुल सूत। । 
***********134***********************      
बहुत सहि चुका देस या नक्सल अत्याचार। 
अब ता ओखे रीढ़ मा हरबी कारी प्रहार। ।
***********135**************************      
सिंघासन बिदुराथै दइ म्याछन मा ताव। 
जनता सिसकै देस मा महगाई के घाव। । 
***********136*************************     
बहिनी से नरकजी तक जे न करैं लिहाज। 
नारी के सम्मान कै ओऊ देंय अबाज। । 
--------  137----------------
घ्वान्घा मा तइती बधी मुदरी नव ग्रह केर। 
बागै  पीर मजार तउ लिहिस सनीचर गेर।। 
**********138*********************
बेमतलब के बहस मा दहकैं ठोंकैं ताल। 
महगाई मा मीडिआ पूँछै नहीं सबाल। ।  
**********139***********************
महगाई जब जब किहिस जनता का हलकान। 
हष्ट पुष्ट सरकार तक लइ लीन्हिन बइठान।  । 
***********140***********************
चुटकी भर के ग्यान का, झउआ भर परमान।
तउअव अपने  आप,  का  हंस  कहै  बिद्वान।।
***********141***********************
भारत माता ही बिकल,सुन के दुःख सन्देश। 
सेना पति का खोय के, शोकाकुल है देस।।
**********142*********************** 
टूटी फूटी सड़क मा, टोल बरिअ र  शुल्क। 
जय हो नेता आप कै, सिसकै बपुरा मुल्क। ।
**********143************************
अपना कहि के चल दिहन, टी बी मा दुइ टूक। 
कोउ  भरा  उराव  मा,  उचै  काहु  के  हूक । ।
*********144*************************** 
मॅहगी जबक चीज भै, महग तेल पिटरोल।
तउ रजधानी मउन ही, कढ़ै न एकव बोल। । 
**********145************************* 
जनता काही बजट या, लागा थै या मेर।
जइसा क़्वामर पान मा, ब्याड़ै लउग चरेर। । 
**********146*************************
सम्पाती  के  दंभ कै,  द्याखा   ऊंच   उड़ान। 
जो जटायु अस उड़त ता, करत देस गुनगान। ।
***********147*************************
गौरव शाली कुर्सियां, बदमिजाज आसीन। 
समझ  रहे  वे  स्वयं  की, मेघा  दक्ष प्रवीन। । 
***********148***************************
दियना  कहिस  अगस्त  से,  दादा  राम जोहार। 
तुम पी लिहा समुद्र का, हम पी ल्याब अधिआर। । 
**********149*****************************
दस दुष्कर्मिन का टिकस, हत्तियार का बीस। 
लोक तंत्र के सदन के, उचै हिदय मा टीस। । 
***********150***************************
केतू  घिनही  लग  रही,  राजनीत  कै चाल। 
टुकुर टुकुर जनता लखै, दइके नाक रुमाल। । 
***********151*************************
दहसत माही कलम ही, कागद करै रिपोट। 
राजनीत कब तक करी, गुंडन केर सपोट। । 
***********152**************************
नारी  के सम्मान  का, नवरातर  है  पर्व। 
ताकी हम पंचे करी, अपने आप मा गर्व। ।
**********153************************
हे ! पुरुषोत्तम राम जू  ,हती  दशानन  मार। 
ताकी कुछ हलुकाय अब, भू मइया का भार। । 
**********154**********************
गाँधी वाद है बिस्व मा एक बिचार अजोर। 
जिनखे बल आई हिआ, आजादी कै भोर। । 
***********155**************************
जिआ सौ बरिस पार तक, जननायक परधान। 
भारत के खातिर हयन, अपना शुभ बरदान। । 
**********156*****************************
जेखे आपन बिछुरिगें, सुधि म भीजै आँख। 
उनही है श्रद्धांजली, के दिन पीतर पाख।। 
**********157***************************
पुरखन के सम्मान का, पितर पाख है सार। 
जे हमका जीबन दयिन,उनखे प्रति आभार। । 
*********158**************************
राष्ट्र गान के हिदय मा, है ज्याखर अस्थान। 
पुनि के चाही प्रान्त  वा, आपन विंध्य महान। ।    
*********159****************************
बिन इस्नु बिन पाउडर, फागुन गमकै गंध। 
द्यांह धरे  बगै  जना ,  रीत  काल  का छंद।।
***********160**********************
अस कागद के फूल मा, महकैं लाग बसंत। 
जस पियरी पहिरे छलय , पंचबटी का संत।।
**********161************************** 
फगुनहटी बइहर चली ,गंध थथ्वालत फूल। 
भमरा पुन पुन खुइ करै, तितली पीठे गूल। । 
**********162*************************
मन मेहदी अस जब रचा, आँखिन काजर कोर। 
सामर  सामर  हाथ  मा, जइसन  गदिया   गोर। ।       
----------163----------------------
असमव उनखे बाग, मा नहीं कोयलिया कूंक। 
मन मसोस रहि जाय औ, उचय हदय मा हूक। ।
***********164**************************
सड़क छाप हम आदमी, उइ दरबारी लोग। 
हम ता बिदुर के साग अस अपना छप्पन भोग। । 
***********165*************************
भेद भाव बाली रही , ज्याखर क्रिया कलाप। 
हर चुनाव के बाद वा, बइठे करी बिलाप। । 
************166**********************
नेतन काही फ्री मिलै , ता लागै खूब उराव। 
जनता के दारी उन्ही , लागै मिरची घाव। । 
***********167************************
नेता  जी  के  नाव  से , उभरै  चित्र   सुभाष। 
अब के नेता लागि रहें, जइसा नहा मा फास।। 
************168***************************
गांव गांव मदिरा बिकै , दबा शहर के पार। 
कउने सब्दन मा करी अपना का आभार। । 
*************169***********************
दारू  बंद  बिहार  मा, लागू कड़क अदेस।
भर धांधर जो पिअय खय ,आबा मध्यप्रदेश।।
आबा मध्य प्रदेश ,हिया ता खुली ही हउली।   
पानी कै  ही  त्रास  खुली मदिरा कै बउली। ।
पी  के  चह  जेतू  मता ,कउनव नहीं कलेस। 
कबहूँ  पाबन्दी  नहीं  अपने   मध्य प्रदेश। ।
*************170**************************
बड़े अदब से बोलिये, उनखर जय जय कार। 
गांव- गांव  मा  चल  रही , गुंडन कै सरकार।।
************171*************************** 
चह जेही थुर देंय उइ ,याकी कहैं कुलांच। 
नेता जी के नाव से, अयी न कऊनव आंच। ।
***********172**************************
सुनिस घोसना कापि गा, थर थर बपुरा पेण्ट। 
खीसा  का  बीमा  करी , जेब  कतरा  एजेण्ट।।  
***********173************************** 
सरबर मा चाकी परै, जब देखा तब जाम। 
ओखे बिन सब अरझ गें , बड़े जरुरी काम। । 
***********174***************************
धन्न  बिन्ध्य  कै भूमि या, धन्न हें बाबूलाल। 
गदगद माटी होइ रही , गांव गली चौपाल।। 
***********175***********************
भूखों  की ए  बस्तियाँ  , औ  फूलों के जश्न। 
ओ माली तेरी नियत पर ,क्यों न उठेंगे प्रश्न। । 
************176*********************
जंगल बिरबा कटरिगे ,मिली कहा अब मित्र। 
फेसबुक मा द्याखत रही , निल कण्ठ के चित्र। ।
***********177************************* 
नील  कंठ  औ शमी  मा  ,देखा  गा   देवत्व। 
दसराहा का शुभ हबै ,दरसन करब  महत्त्व। । 
***********178***************************
अपने छाती  हाथ  धर ,  खुदै  करा    महसूस। 
अइसन कउन किसान है, जे नहि दीन्हिस घूस। । 
**********179********************************
जिधना से भृगु जी हनिंन , श्री हरि जू का लात। 
लछमी जी रिसिआय के, पेल भगीं गुजरात।।  
*********180**************************
बहुत बड़े धर्मात्मा बड्डे धन्ना सेठ। 
पै ओखर नोकर रहैं बपुरे भूखे पेट।। 
*********181*****************************
जे कबहूँ खाइस नही रोटी भाइन साथ। 
ओखे हाथे मा हबै जगन्नाथ का भात। । 
**********182**********************
कबहूँ कुरुआ  मा नपयन ,कबहूँ नपयन कुरई। 
बासमती  उनखे  निता,   हमरे   निता   कोदई। । 
**********183*********************
हाँ  हजूर  हमहूं  हयन , फाँसी  के  हकदार। 
हमसे  कहबररै  नहीं ,  रिक्शा  काहीं  कार। । 
**********184*********************
मघा नखत बदरी करय धरती का खुशहाल।
महतारी  के  हाथ  कै  जइसा  परसी  थाल।।  
**********185*************************
नीचन  मा  सत्सङ्ग  का ,  एकव   नहीं प्रभाव। 
जस घिनहाई मा रमै , कुकूर सुमर सुभाव।।  
**********186***********************
राजनीत औ मीडिआ ,दुनहु का दिल फ्यूज। 
इनही  चाही बोट औ ,उनही ब्रेकिंग न्यूज़। ।  
*********187***********************
अंतस मा पीरा करै, अपनेन का बेउहार। 
लंका जीते राम जू , औ गें अबध मा हार। ।  
**********188*********************
चोरन का चोट्टा दिखय ,औ शाहन का शाह। 
पै झरहन  कै रात दिन ,सुलगै छाती डाह। ।  
**********189*********************
हाथे मा मेंहदी रची ,कर स्वारा सिगार। 
गउरी पूजैं का चली ,सजी सनातन नार। । 
**********190*************
भले  छह्याला   मा रहा  ,सत्त  सनातन  बीज। 
आपन सत छाड़िस नहीं ,परिपाटी अस चीज। । 
**********191**********************
चुनकी  मा चुकरी धरे ,भरे  सतनजा  भूंज। 
 दाऊ कै मइया चली , अगना हरछठ पूज।। 
**********192********************
छुला जरिया कांस औ ,पसही महुआ फूल।  
हरछठ प्रकृति अभार कै ,हिबै भाबना मूल। । 
*************************  
**********193**************
भारत माता के रतन लाड़िल अटल लोलार। 
जन जन के हिरदय बसें दीन्हिस देस दुलार।।
*********194************************* 
अटल बिहारी देस के उज्जर एक चरित्र। 
उनखे अस को देस मा भला बताबा मित्र।। 
*********195**********************
भारत के नेतन निता अटल एक इसकूल। 
देस देय श्रद्धांजली सादर आंखर फूल।। 
*********196********************
आसव  के सामन  मा  सजनी , भा  येतू बदलाव। 
तुम लगत्या हा खजुराहो अस ,औ हम देवतलाव।।  
*********197*******************
धनहन  मा  दर्रा  परा ,पाबस मरै पिआस। 
दम्भी बादर कइ रहें , सामान का उपहास।।  
*********198****************
ऊपर दउअय रुठि गा ,औ नीचे दरबार। 
धरती पुत्र किसान कै , को अब सुनै गोहर।। 
********199*****************
रुपया किलो अनाज मा ,जबसे जांगर टूट। 
दिन भर ख्यालै तास उइ ,साँझ पिअयं दुइ घूंट। । 
********200************************
दिल्ली ललकारै लगी ,सुन रे बीजिंग नीच। 
जो तै ब्रातासुर  हये , ता  हम  बज्र  दधीच। । 
*********201*********************
हर  हर  महादेव  से , गूंज  उचा गलबान। 
ललकारिस जब इंडिया , चीनी पेल परान। । 
*********202**********************
दगा बाज ओ चाइना ,तोही दई तिलाक। 
अब भारत के हद्द मा , चली न एकव धाक। ।
*********203********************* 
बांसठ का भउसा नहीं , सुन ले जाहिल चीन। 
अब  भारत  समरथ हबै ,  घुस  के  लेइ बीन। ।  
********204***********************
कोउ हिंदू मुस्लिम करै ,कोऊ आर्य अनार। 
दोउ जन का चलि रहा ,है घिनहा ब्यापार। । 
*********205********************
किहिन मजुरै देस का ,सबसे ज्यादा काम। 
तउअव जस मानै नहीं ,मालिक नामक हराम।। 
*********206***********************
धोखा दीन्हिस इंडिया ,भरी बिपत के ठाँव। 
तब  आंसू  पीरा लये , भारत  पहुंचा   गांव। ।  
*********207**********************
हमरे हियाँ गरीब कै, सब दिन आँखी भींज। 
धन्ना  से ठ कै आत्मा ,  कबहूँ  नहीं  पसीझ। । 
*********208**************************
रोटी से बढ़ के हिबै ,जेखे नित अमलास। 
वा कइसा अनुभव  करी ,पीरा आंसू त्रास।। 
*********209*******************
हमरे हियाँ मनइन  कै ,गजब निराली शान। 
पेटे  मा  दाना  नहीं ,  मुँह  मा  दाबे   पान। ।   
*********210*****************
भाई  चारा  प्रेम  का , चला  लगाई  रंग। 
तबहिन अपने देस मा बाजी झांझ मृदंग। । 
********211*********************
जनता से बढ़ के नहीं ,लोकतंत्र मा  धाक। 
रय्यात से गर्रान जे , बागा रगड़त नाक।। 
*******212********************
क्यत्ता बड़ा बिचित्र है ,देस भक्त दरबार। 
जे हाँ मा हाँ  न कही ,वा घोसित गद्दार। । 
********213***********************
बामपंथ अस जाड़ है पूंजीपति कस  पूस।
उनखे सोसन दमन मा, सूरज केर जलूस। । 
********214*******************
हमरे देस मा होइ चुकें ,अइसा निर्मल गाँव। 
लोटिया  लै  बाहर  चली , बहू  बराये   पाँव।।  
********215*********************
आजादी के दिआ माँ, भरिन जे  बाती तेल। 
भारत रतन सपूत हैं ,श्री सरदार पटेल। ।  
********216************************
दुनिआ में अनमोल क्षण ,होता माँ का साथ। 
माँ ही अबध की साँझ है ,माँ कशी का प्रात। 
*********217********************
जीवन  में  भरता  रहे , रंगोली  सा  रंग। 
उगे भाग्य का भास्कर ,लेकर नई उमंग। । 
*********218***********************
 जिधना जमुना जी किहिन, यम के तिलक लिलार। 
भाई  बहिन  के  प्रेम  कै ,  बन  गय  दुइज   लोलर। । 
***********219*************************
हयी  हमारे  देस  मा ,  बहिनी  बिटिआ  पूज। 
भाई  बहिन  के  प्रेम  का  ,पाबन  भाई  दूज। । 
************220********************
ईसुर  से  बिनती  करी , यहै  लालसा   मोर। 
अपना का जीबन रहै , जगमग  सदा अजोर। । 
************221*******************
जुगनू जब खेलिस जुआं , लगी  जोधइया दाव। 
पुनमासी  पकड़ै  लगी ,    अधिआरे   के   पाँव। ।
***********222*********************
हमरे  तिथ  तिउहार  मा ,  जब  से चढ़ा बजार। 
हम बांसुरी का भूल के , किहन बरूद से प्यार। ।  
***********223**************************
चारिव कइती लगी है ,मोरे देस मा जोंक। 
जे नहि चूसै पा रहा , वहै रहा है  भोंक  । ।  
**********224**********************
हे लछिमी जू आइये , साथै सिरि गनेस। 
मोरे भारत देस मा , दालिद बचै  न शेष।। 
************************
जिधना से भृगु जी हनीन  ,श्री हरि जू  के लात। 
लछमी  जू  रिसिआय के ,  चली  गयीं गुजरात। । 
**********225*************************
दियना  कहिस  अगस्त से,  दादा  राम लोहार। 
तुम पी गया समुद्र का ,हम पी ल्याब अधिआर। । 
दीपदान  कै लालसा , तीरथ का अनुराग।
चित्रकोट कोउ जा रहा कोऊ चला प्रयाग। । 
**********226********************
धरमराज  कै फड़ सजी ,  चलै जुआं का खेल। 
गाँव  गाँव  मा  झउडि गय , शकुनी बाली बेल। । 
*********227******************
राबन के भय से लुका , जब से बइठ कुबेर। 
तब से धनी गरीब कै अलग अलग ही खेर। । 
********228*****************
उल्लू   का  खीसा  भरा ,  छूंछ हंस कै जेब। 
या भोपाल कै चाल  की, दिल्ली का फउरेब। । 
*********229****************
जब सागर का मथा गा ,कढ़े रतन दस चार।
ओहिन मा धन्वन्तरी , मिलें हमी उपहार। ।
*********230***********************
दुनिआ भर कै औषधी , रोग बिथा संताप। 
धनबन्तरि का सब कहै , आयुर्बेद का बाप। ।
**********231****************
तिली मूंग उर्दा सरा , भा यतरन  झरियार। 
बरा मुगउरा के निता , परी कहाँ से दार। ।
**********232*********************
भारत कै पहिचान हें ,राम बुद्ध औ कृष्न। 
इन माही स्वीकार नहि ,कउनव  चेपक प्रश्न।। 
*********233************************
हिन्दी डाक्दरी पढ़ रही,गदगद मध्यप्रदेस।
पै अंगरेजी  से  लड़ै , हाई कोट  मा  केस।।
*********234*******************
उइ ठेगरी लगबा रहें मार मार के ख्वाँग। 
औ जनता बिदुराथी देखि देखि के स्वाँग। । 
********235********************
ख़बरदार होइ के मिल्या बहुत न मान्या सूध। 
वा गुलदस्ता मा धरे है गोली बम बारूद।। 
*********236****************
 जेही सब मानत रहें जादा निकहा सूध।
ओखे डब्बा म मिला सबसे  पनछर  दूध।।
*********237******************
 गदिअय खजुलइया धरे, कजरी गाबै पर्व। 
अपने  तिथ  तिउहार  का, गाँव समेटे गर्व। । 
********238************
 साहब सलाम औ पैलगी, गूंजै राम जोहर। 
अबहूँ अपने  गाँव मा,  बचा  हबै   बेउहार। । 
*********239*************************
 भाई चारा प्रेम का खजुलइयां तिउहार। 
बढ़ै अपनपौ देश मा मेल-जोल बेउहार। । 
*********240****************
 छुरा घोंपते पेट में चढबाते परसाद। 
जैसे लेखनी पूजता हो कोई जल्लाद। । 
********241******************
धर फूलों के बीच में जिसने ठोकी फ़ांस। 
हमने देखा आँख से उसका होते नाश। ।
********242*******************
 त्राहिमाम जनता करय गुंडा हाकै राज। 
मुड़धारियन के कण्ठ से निकरै नही अबाज। । 
*******243*******************
बने हितैषी घूमते रचते नाना ढोंग। 
शोषण करते जाति का स्वयं जाति के लोग। । 
********244*********************
 जिसने कभी विकास पर दिया तनिक न ध्यान। 
जाति   वाद   उनके  लिए  सत्ता का सोपान। ।
*********245******************
 'हंस ' योग्यता का सदा रहा सुखद परिणाम। 
अफजल को फाँसी मिली राष्ट्राध्यक्ष कलाम। । 
**********246***********************
भले अभावों से सदा रहे जूझते जंग। 
पर जीवन के चित्र में हो ईमान का रंग। । 
**********247**********************
 उनखर हिबै समाज मा सबसे लम्बी पूछ। 
जे बैभव से भरे हें संवेदना से छूछ। । 
**********248***********************
लेखनी जब करने लगी कागद लहू लुहान। 
 ब्रह्म शब्द तक रो पड़ा धरा रह गया ज्ञान। । 
**********249**********************
 बपुरा सुविधा संच का तरसै हिंया मजूर। 
अपना का आँसै नही वा भर मुंह कहै हजूर। । 
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 सत्ता अउर साहित्त कै बस येतू बिरदन्त। 
उनखे कई 'जयन्त ' औ हमरे ठई ''दुष्यंत "। । 
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 यहाँ पसीना देश को देता पूरी क़िस्त। 
पता करो क्यों आज भी वो है पड़ा सिकिस्त। । 
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  दशा देखिये श्रमिक की या उसका उन्माद। 
पीड़ा   में   मावाद   है  मुंह में जिन्दावाद। । 
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 है प्रत्यक्ष प्रमाण सी , श्रम की  साधक आह। 
खड़ा हुआ ये ताज है, वो हो गये तवाह। । 
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 ऐसा जीवन दीजिये हे राम तुम्हें सौगन्ध। 
मेरे रिश्तों से कभी आये न दुर्गन्ध। । 
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घातक भ्रष्टाचार से यहाँ मिलावट खोर।
करते है ये देश का तन मन धन कमजोर। ।
******PANDIT DEEN DAYAL **********

गाहिंज करै गरीब कै, करै दीन का ख्याल। 
अंत्योदय के मंत्र हें,   पंडित   दीन  दयाल।।   
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जब भारत माही मची, सामाजिक दहचाल। 
मानववाद लइ आय गें, पंडित दीन दयाल।। 
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अपने  तीरथ बरथ मा, राष्ट्र वाद का प्रेम। 
'एकात्म' के ग्रंथ मा, सबका  हित औ क्षेम।। 
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बसै  देस कै  आतिमा, टोला गाँव देहात। 
पंडित जी के  सूत्र  हें,  जगन्नाथ अस भात।। 
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राष्ट्र वाद के कलश अस,  एकात्म के मूल। 
पंडित जी शतशत नमन, करै बघेली फूल।।
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 चाहे ये सत्ता रहे या कि और  विधान। 
पंडित दीनदयाल का बिखरे न अभियान। । 
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 आंसू क्रंदन का यहां मत कीजै व्यापार। 
अन्य दिशा में मोड़िये राजनीति की धार। । 
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 सदा गरीबों ने लड़ा लोकधर्म का युद्ध। 
पर कुलीन की कोख से आये सब दिन बुद्ध। । 
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 पूंजी पति की देखिये सूझ बूझ तरकीब। 
हरे लाल के रंग में बंटता रहा गरीब। । 
**********263*****************
 वैचारिक सी वामियां सिद्धांतों के पाप । 
जनमेजय को डस रहे नाप नाप कर सांप । । 
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जनता के हाथे हबय लोकतंत्र का मान। 
चला चली सब जन करी सौ प्रतिशत मतदान।। 
🌻🌻🌻🌻🌻🌻265
रहा गरीबन से सदा बोटन का बेउहार। 
दूबर का एकादशी मोटन का तेउहार।। 
🌻🌻🌻🌻🌻🌻266
अबै गरीबन के लगी टप टप अंसुअन धार। 
अइसा मा कइसा लिखी पायल कै झंकार ।।
🌻🌻🌻🌻🤗267
कत्ती घिनही लग रही राजनीति कै चाल।
कबौ उखाड़ै बार वा कबौं उधेरै खाल।। 
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पन्नी बीनत बीत गै ज्याखर उमिर किसोर। 
ओखे दुअरै कब अइ बाल दिबस कै भोर।। 
🌻🌻🌻🌻🌻269🌻🌻🌻🌻🌻
जे कबहूं जानिस नही पोथी अउर सलेंट। 
बूटन मा पालिस किहिस होटल घसिस पलेट।। 
🌻🌻🌻🌻🌻270🌻🌻🌻🌻🌻
हिंआ ब्यबस्था खाय गै पंजीरी औ खीर। 
गभुआरन के भाग मा बदी कुपोसित पीर।। 
🌻🌻🌻🌻🌻271🌻🌻🌻🌻🌻
दरबारी जेही कहै बोटहाई मा नात। 
पै कबहूं देखिन नही वाखर दुधिया दांत।। 
🌻🌻🌻🌻🌻272🌻🌻🌻🌻🌻
हबैकुपोसित देस मा जेखर ल्यादा घींच। 
ओ! बालदिबस फुरसत मिलै ता उनहूं का सींच।। 
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जातिहाई का जानिगें उइ अटकर अंदाज। 
सुदिन देख ह्यराय चलें जब बिटिया का काज। । 
जब बिटिया का काज जबर है दइजा  नाहर। 
सुन दहेज़ का भाव थूंक न निकरै बाहर। । 
बिन दइजा  के बड़ मंशी का को अपनाई। 
हंस कहिन बस वोट के खातिर ही जातिहाई।। 
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वे महापुरुष से खेलते जातिवाद का खेल। 
चाहे नेहरू ,भीम ,हों य सरदार पटेल। । 
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महापुरुष हैं देश में, राष्ट्रवाद के गर्व। 
उनके नाम होने लगा जातिवाद का पर्व। । 
********276*********************
जब 'लज्जा 'की लेखनी, की खींची गई चीर। 
लेते रहे ईनाम वे, रही सिसकती पीर। । 
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जो कलबुगी पे मुखर हैं औ रूश्दी पर मौन।
उनसे जाकर पूछिये है पाखण्डी कौन। ।
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 हवन कुण्ड मागय लगा पण्डित का बलिदान। 
 पूजा पत्री छोड़ के पेल भगें जजमान। ।
***********278**********************
 जो राष्ट्रीय पहिचान म कहू ठे होत कबीर। 
तब न होत घिनहा यतर धरम केर उपचीर। । 
**********279*********************
 खड़ी जलाका जेठ कै औ भै बिजली गोल। 
कूलर से बिजना कहिस जान्या हमरिव मोल। । 
**********280*******************
आने वाली पीढ़ियाँ कर सकती हैं नाज़। 
दृढ़ता से आतंक का जो कर सके इलाज।  ।  
**********281******************
चांदी  कै चम्मच करै , पतरी केर दुलार। 
या बरबस्ती देख के , दोनिआ परी उलार।।  
**********282**************************
बड़ा अमारक जाड़ है ठठुरा है परधान। 
उइं बिदुराती हईं कह 'दुइ रूई 'का उपखान।।
***********283*********************
 छुरा घोंपते पेट में चढबाते परसाद। 
जैसे लेखनी पूजता हो कोई जल्लाद। । 
**********284********************
राहिमाम जनता करय गुंडा हाकै राज। 
मुड़धारियन के कण्ठ से निकरै नही अबाज। ।
***********285*********************
बने  हितैषी  घूमते , रचते  नाना  ढोंग। 
शोषण करते जाति का स्वयं जाति के लोग। ।
**********286*******************
 उनखर हिबै समाज मा सबसे लम्बी पूछ। 
जे बैभव से भरे हें संवेदना से छूछ। । 
**********287***********
नफरत   कै खेती  करैं ,मन  के  रोगी लोग। 
 हे धनबंतर  जी करा ,उनखर हिदय निरोग।।  
********** 288********** 
देस मा  भ्रस्टाचार का, ह्वाथै यतर निदान।
जइसा जींस पहिर के काटै फसल किसान।
********    289     ************   
ओतुन परबस्ती करा , जेतू कूबत पास।
परोपकार मा चला गा ,भोले का कैलास।। 
*******  290   ***********
रहिमन पनही राखिये ,बिन पनही सब सून। 
दिल्ली से देहात तक ,पनही का कानून।।  
*********  291   **********
श्री राघव जू आ रहें बीते चउदह साल।
या उराव मा जलि रहे घर घर दीप मशाल।।
************292*****************
येतू दीन्हिस देस का, आभारी है हिंद ।
तउअव रोजी के निता , तरसै बपुरा बिंध । । 
************293*********************
पहिले प्रेम प्रसंग का ,खूब भा लोकाचार।
 फेर ओही लुच्ची  कहिस ,वा ओहि दहिजार।। 
*************293****************** 
बिद्या का मंदिर दिहिन उंइ निकहा के लीप।
कोऊ लइगा जंगला, कोऊ सरिआ चीप।।
*************294*********************** 
वा कुपंथ कै देख ल्या केतू कुटिल हिआव। 
आर्य द्रबिन मा भेद कइ ,बाँट रहें हें गॉव।। 
*****************295********************
धन्न चनाक्य अस गुरू का ,धन्न माँ धर्मा कोख।
भारत माता का दइन , पूत महान अशोक। ।
****************296*********************
देखा केतू गहिर है लोकतंत्र का कुण्ड।
राजकुमार जयंत तक बनगे कागभुसुण्ड।।
******************297***************
कहिस कुलांचै धरम का, दिहिस आतिमा रोय।
जइसा कउनव बाप कै, बिटिआ भागी होय।।
******************298*****************
जउनै दल हेन न करी, धरम कै जय जयकार।
बामपंथ अस होइ जई, वाखर बंटाधार।।
******************299****************** 
राजनीत कै नीचता, देखि के जुग चउआन।
गांधी बादी देंह मा, बाम पंथ के प्रान।।
*****************300********************
तानासाही सोच का लोकतंत्र न रास।
पेटे मा अकरास ही मुंह माही उपहास।।
***************310*******************
बंदेमातरम जब कहिन, हमरे देस के पूत।
सुन बइरी थर्राय गा, दिहिस पेण्ट मा मूत।।
**************302**********************
दुनिआ माही को करी, हमरे देस कै सउज।
हर हर महादेव जब, ब्वालै आपन फउज।।
*************303*************************
मोदी हमरे देस के, स्वाभिमान परतीक।
भुट्टो कै अउकात ही, जइसा पान कै पीक।।
*************304************************
कमल नाथ जी कइ दिहिन रिन माफी एलान।
कहिस किसनमा की जना बहिला भंइस बिआन।।
****************305************************
भारत कै ही कामना, अपनव बनी नजीर।
जइसा माता इंदिरा, दिहिन "पाक" का चीर।।
****************303************************
काही है सुभ कामना , क्याखर हबय बिधंस। 
नये साल का राशिफल , बांच रहे हैं हंस।। 
***************304* ********************
न सामन कै हरिअरी न नदिअन मा धार। बइठ किसनमा मेंड़ मा गदिआ धरे कपार।।


 
============305=================
बड़ा अमारक जाड़ है, ठठुराबय दहिजार।
साजन से सजनी कहिस, लगत्या आजु पिआर। ।
*****************306***********************
जाड़े का ओरहन दइस,भींज वास कै रात।
ता संज्ञा का छोड़ के, सुरिज कढ़ा बिदुरात।।
*****************307********************
बामपंथ अस काइंया, हबइ करोना गाज।
हमरे बइरी चीन के, ईं दूनउ उपराज।।
*****************308********************
राजनीत औ धरम का, जुगन जुगन से साथ।
अजुअव हें उइ साथ मा, भला कउन नई बात।।
******************309**************
हे जग जननी सारदे, मै मांगों कर जोर।
भारत मा सुख संच कै,पबन बहै चहुओर।।
नबा साल मा सब जने, रहैं निरोग प्रसंन्न।
सब काही रोजी मिलय, खेतन मा हो अन्न।।
****************307****************
बड़ी बड़ाई का लगै अपना का जो मोह।
ता कुछ जन का जोर के लेई बनै गिरोह।।
******************308*******************
कूकुर का कूकूर लगै, दिखय सिंह का शेर।
यातो ओछाहिल सोच ही,याकि नजर का फेर।। 
******************309*******************************
सत्य अहिंसा प्रेम का गाँधी एक बिचार।
गाँधी दरसन मा हबै जीवन का सुख सार।।
 ********************310*****************************************
हम डिस्पोजल चाय के, उइ नेतन कस ओठ। 
फिरि के पुन झांकिन नहीं, जब से परिगें बोट।। 
   भारत रतन पटेल 311
आजादी  के दिआ मा,  भरिन  जे  बाती तेल। 
देस  करै  सत  सत नमन ,भारत रतन पटेल।। 
312  
पांच सै बांसठ राज मा, अइसा कसिन लगाम। 
सब उनखे  ललकार से ,लिहिन तिरंगा थाम। ।
313  
 सिरि  सरदार पटेल कै , सूझ बूझ औ ढंग।
 देख के साहस बीरता ,दुनिया रहि गय दंग।
 314
गुरिआ गुरिआ गुहि दिहिन ,देस का साहुत सूत। 
जय  बल्लभ  'सरदार'  जी,  भारत   रतन  सपूत। ।
 315
हम भारत बासी करी ,शत शत नमन अभार। 
जब  तक चंदा  सुरिज हें,  नाव चली सरदार।  । 
316  
  शम्भू काकू
***********************************
जहां बघेली आय के, होइगै अगम दहार।
वा रिमही के शम्भू का, नमन है बारम्बार।।
317
बघेली साहित्त के, शम्भू काकू सिंध।
देह धरे गाबत रहा, मानो कबिता बिंध। ।
318
गांव गली चउपाल तक, जेखर बानी गूंज।
श्री काकू जी अमर भें, ग्राम गिरा का पूज। ।
319
लिहे घोटनी चल परैं, जब कबिता के संत।
सब कवि काकू का कहैं, रिमही केर महंत। ।
320
न चुट्कुल्ला उइ कहिन, ना अभिनय परपंच।
बड़ा मान आदर दइस,तउ कबिता का मंच। ।
321
जेखे कबिता के बिषय, आंसू आह कराह।
अच्छर फरयादी बने, काकू खुदै गबाह। ।
322
कबिता का पेसा नहीं, जेखे कबहूं चित्त।
बिन्ध्य लिलारे मा, लिखे, काकू केर साहित्त। ।
323
आंखर आंखर मा बसय,काकू कै कहनूत।
हंस बंदना कइ रहा, धन्न बघेली पूत। ।
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324
बब्बा जी कीन्हिन रहा खसरा केर अपील।
नाती तक पेसी चली बिदुराथी तहसील।।  
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                325     
भारत के इतिहास मा आबा अइसा बक्त। 
महबूबा तक बन गयीं महादेव कै भक्त।।  

हाथे मा मेंहदी रची , कर स्वारा सिगार।
गउरी पूजैं का चली ,सजी सनातन नार। ।

खूब फलिहाइस रात भर, दिन निर्जला उपास। 
देखा  भारतीय  प्रेम के ,  अंतस  केर मिठास ।। 

जबसे उंइ डेहरी चढ़ीं ,  छूट हिबय सरफूंद ।  
हमरे  जीबन के  दिहिन , सगले अबगुन मूंद।।    
हेमराज हंस 
 
 
********************  हेमराज हंस 

बुधवार, 5 अक्टूबर 2022

मैहर में विराट कवि सम्मलेन


माँ शारदा की पावन भूमि मैहर में विराट कवि सम्मलेन माँ शारदा प्रवन्धक समिति मैहर द्वारा  दिनांक ०२ अक्टूबर २०२२ को संपन्न हुआ। जिसमे मैहर के वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामाधार शर्मा अनंत जी का नागरिक अभिनन्दन किया गया। पदम् श्री बाबूलाल दाहिया जी ,राजलालन मिश्र जी,रविशंकर चतुर्वेदी जी,तेजभान सिंह तेज सतना सतेंद्र पाण्डेय  जी सतना   नीलम कश्यप जालौन ,हेमराज हंस भेड़ा  ,पंकज पंडित ,ललितपुर डॉ. राज शर्मा मनगवां , राम लखन सिंह बघेल महगाना ने काव्यपाठ किया संचालन अमित शुक्ला रीवा ने किया। 

भूंखा टोरबा सोयगा,

भूंखा टोरबा सोयगा,  रोटी रोटी कील्ह। महतारी बनबत रहीं, छत मा ठाढे रील।।